अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (INR) हाल ही में अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये की इस कमजोरी के साथ-साथ आज निफ्टी 50 इंडेक्स में भी गिरावट देखी जा रही है। अक्सर जब बाजार लाल निशान पर होता है और करेंसी गिरती है, तो नए निवेशक घबरा जाते हैं। हालांकि, लंबी अवधि के मुनाफे के लिए यह उतार-चढ़ाव निवेश का एक रणनीतिक मौका भी हो सकता है। अपनी वेल्थ को सही ढंग से मैनेज करने के लिए इस वक्त शांत रहना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
रुपये की कमजोरी का सीधा असर कच्चे तेल के आयात पर पड़ता है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं। इसका असर आपकी जेब पर भी होता है—चाहे वो ईंधन के दाम हों या आपके अगले स्मार्टफोन की कीमत। निवेशकों को यह समझना होगा कि घरेलू बाजार में होने वाली ऐसी हलचल अक्सर वैश्विक कारकों (Global factors) की वजह से होती है। ऐसे समय में गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। गिरते रुपये के असर से बचने के लिए अपने निवेश में विविधता (Diversification) रखना ही सबसे अच्छा बचाव है।

रुपया और निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच SIP बनाम एकमुश्त निवेश
कई नए निवेशक इस उलझन में रहते हैं कि क्या बाजार में गिरावट के दौरान उन्हें अपनी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रोक देनी चाहिए। सच तो यह है कि गिरता हुआ बाजार आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका देता है, जिसे 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' कहा जाता है। अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है, तो उसे एक साथ (Lump sum) लगाने के बजाय अगले कुछ महीनों में किस्तों में निवेश करें। इससे जोखिम को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद मिलती है।
| निवेश का प्रकार | 5 साल का रिटर्न | 10 साल का रिटर्न | 15 साल का रिटर्न |
|---|---|---|---|
| इक्विटी म्यूचुअल फंड | 12 प्रतिशत से 15 प्रतिशत | 14 प्रतिशत से 16 प्रतिशत | 15 प्रतिशत से 18 प्रतिशत |
| बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | 6.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत | 6 प्रतिशत से 7 प्रतिशत | 6 प्रतिशत से 7 प्रतिशत |
जब घरेलू करेंसी भारी दबाव में हो, तो अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना बेहद जरूरी हो जाता है। इंटरनेशनल फंड्स में निवेश कर आप बढ़ते डॉलर का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा, टैक्स के लिहाज से बेहतर रिटर्न के लिए आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का विकल्प भी चुन सकते हैं। नए निवेशकों को अपनी एसेट एलोकेशन पर नजर रखने के लिए 30 दिनों का एक एक्शन चेकलिस्ट बनाना चाहिए। ये कदम सुनिश्चित करेंगे कि बाजार की गिरावट के बावजूद आपके फाइनेंशियल गोल्स पटरी पर रहें।
वेल्थ क्रिएशन का सफर मार्केट टाइमिंग से ज्यादा आपकी निरंतरता (Consistency) पर निर्भर करता है। निफ्टी में मौजूदा गिरावट का इस्तेमाल अपनी रिस्क लेने की क्षमता और निवेश की अवधि को परखने के लिए करें। डेट और इक्विटी के बीच सही तालमेल आपकी बचत को महंगाई की मार से बचाएगा। आज से ही छोटी शुरुआत करें, अनुशासित रहें और कंपाउंडिंग को अपना काम करने दें। अनिश्चितता भरे इस वित्तीय माहौल में सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।


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