नयी दिल्ली। सरकार ने किसानों के लिए संसद में एक नया कृषि बिल पेश किया, जिसके खिलाफ देश भर में विरोध हो रहा है। विपक्षी पार्टियों से लेकर किसान तक इस बिल का विरोध कर रहे हैं। मगर कृषि बिल-2020 लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में भी पास हो चुका है। किसान इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की बात नहीं की गई है। किसान इस बात से घबरा रहे हैं कि एमएसपी सिस्टम खत्म न हो जाए। किसानों को एमएसपी की इतनी चिंता क्यों है और ये उनके लिए क्यों जरूरी है आइए जानते हैं।
नुकसान से बचते हैं किसान
कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा चुनिंदा फसलों के लिए एमएसपी का ऐलान किया जाता है। एमएसपी बुवाई सत्र से पहले ही घोषित कर हो जाता है। एमएसपी के जरिए किसानों को इस बात की तसल्ली मिलती है कि यदि उनकी फसल का दाम मार्केट में गिरा तो भी सरकार उन्हें तय एमएसपी अदा करेगी। इससे किसानों का नुकसान कम होता है। एमएसपी से किसानों को एक निश्चित भाव मिलना तय रहता है। वैसे एमएसपी सभी किसानों को लाभ नहीं पहुंचा पाता। क्योंकि सभी राज्य सरकारें इसका फायदा किसानों को नहीं देती।
कैसे तय होता है एमएसपी
जिन चीजों को ध्यान में रख कर एमएसपी तय होता है उनमें उत्पाद की लागत, फसल में काम वाली चीजों की कीमतों में बदलाव, मार्केट भाव कैसा है, डिमांड और सप्लाई के हालात और देश तथा देश के बाहर के हालात देखे जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शांता कुमार समिति की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 6 फीसदी किसानों को ही एमएसपी व्यवस्था का लाभ मिलता है, बाकी किसान मार्केट भाव पर आश्रित रहते हैं।
कैसे तय होती है फसल लागत
फसल की लागत निकालने के लिए जो फॉर्मूला है उसमें किसान जो भी कैश पेमेंट करते हैं वो और खाद, कीटनाशक, बीज, सिंचाई आदि को शामिल किया जाता है। एक दूसरे फॉर्मूले के तहत इसमें बताई गई चीजों के अलावा किसान परिवार का मेहनताना भी जोड़ा जाता है। एक और तीसरा फॉर्मूला है जिसे Comprehensive Cost कहते हैं। इसमें बताई गई चीजों, किसान परिवार के मेहनताने के ऊपर उस जमीन की इंफ्रा लागत भी शामिल की जाती है जिस पर खेती हुई है। यानी जमीन का किराया और खेती में काम आए पैसे पर ब्याज को भी जोड़ा जाता है। इतना ही नहीं कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी Comprehensive Cost में होता है।
एमएसपी के फायदे
एमएसपी से सिर्फ किसानों को नहीं बल्कि आम जनता को भी फायदे होते हैं। इससे कीमतों में स्थिरता बनी रहती है। किसानों को न्यूनतम रेट मिलना तो तय ही रहता है। बाजार में सप्लाई की कमी नियंत्रित रहती है, जिससे रिटेल कीमतें नहीं बढ़ती। उचित मूल्य पर खरीदारी सुनिश्चित रहती है। सरकार का दावा Comprehensive Cost + 50 फीसदी फॉर्मूले से एमएसपी देने का दावा करती है। मगर जानकार और किसान संगठनों से जुड़े लोग सरकार के इस दावे को गलत कहते हैं।
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