जिस तरह से हाथरस में सत्संग के बाद दर्दनाक घटना घटी और भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई, उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता अपने आप में बेहतरीन उदाहरण है।
हाथरस में आयोजित सत्संग की इजाजत पहले से ली गई थी। लेकिन अचानक जिस तरह से भीड़ इस कार्यक्रम में बढ़ी और इसके बाद सेवादारों का गैरजिम्मेदारा रवैया देखने को मिला वो गंभीर सवाल खड़ा करता है।

हादसे के तुरंत बाद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यक्तिगत स्तर पर मोर्चा संभाला। तत्काल सरकार के दो मंत्रियों, डीजीपी को मौके पर भेजा और इन लोगों ने यहां कैंप करना शुरू कर दिया। घायलों को हर संभव बेहतर इलाज मिले इसका इंतजाम किया गया।
किसी भी हादसे में जब लोगों की जान जाती है तो इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता है, लेकिन घटना के बाद प्रशासन किस तरह का रवैया दिखाता वह जरूर काफी अहम हो जाता है।
घटना के अगले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पहुंचे और बारिश के बावजूद घटनास्थल का मुआयना किया, घायलों से अस्पताल में मिले, उनका हालचाल लिया। इसके बाद सीएम ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें निर्देशित किया कि इस पूरे मामले की तह तक जाएं।
योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन करने के बाद इसकी न्यायिक जांच के भी आदेश दिया। यह जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में की जाएगी। ऐसे में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि वह इस मामले में किसी भी तरह की लीपापोती के मूड में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी इस मामले में दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और आने वाले समय में इसका दायरा बढ़ेगा। यानि सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि इस एफआईआर की जद में भोले बाबा भी आ सकते हैं।
एक तरफ जहां इस मामले को लेकर विपक्ष ने राजनीतिक हमला तेज किया तो सीएम योगी ने इस हादसे में घायलों के हर संभव बेहतर इलाज की कोशिश को तेज कर दिया। एक तरफ जहां पीड़ितों की मदद की जा रही थी तो दूसरी तरफ घटना के आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई।
हाथरस पहुंचने के बाद खुद मुख्यमंत्री मीडिया के सामने आए और उन्होंने इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मामले में किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है और बड़े एक्शन की तैयारी में हैं।
बहरहाल यह पहली बार नहीं है जब बड़ी घटना होने पर खुद मुख्यमंत्री ने फ्रंटफुट पर सामने आकर मोर्चा संभाला है। इससे पहले भी कोरोना काल में खुद मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में लोगों की मदद के लिए मोर्चा संभाला था और लोगों के बीच पहुंच गए थे। उन्होंने निर्भीकता के साथ उस दौरान लोगों की मदद के लिए जमीन पर उतरकर काम किया था।
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