नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। एक छोटी बिजनेस यूनिट को एक ब्रांड में तब्दील कर पाना बेहद मुश्किल काम है। फिर इसे आप एक स्टार्टअप में कंवर्ट कर पाएं वो इससे बड़ा कदम है। मगर कुछ लोग ऐसा कर पाते हैं और यही वो लोग होते हैं, जिनके पास एक कहानी सुनाने के लिए होती है। अपनी कामयाबी की कहानी। दूसरों के लिए हमेशा 'कल' होता है। एक ऐसी ही मिसाल कायम की है अमित नानवानी और दीक्षा पांडे ने। इन दोनों ने समोसे, जो भारतीयों का फैवरिट स्नैक है और हर जगह उपलब्ध रहता है, को एक यूनीक आइटम बना कर करोड़ों रु का बिजनेस खड़ा कर दिया। अब उनका एक स्टार्टअप है 'समोसा पार्टी'।
कैसे आया प्लान
दीक्षा ने देखा कि लोकल स्नैक्स का बड़े पैमाने पर कोई क्यूएसआर ब्रांड नहीं है। छोटे शहरों में भी, ब्रांडेड बर्गर और पिज्जा ढूंढना आसान है, लेकिन अगर कोई लोकल स्नैक्स चाहता है, तो लोग अपने पड़ोस की हलवाई और दुकानों पर निर्भर रहते हैं। वे उपभोक्ता व्यवहार और इन अवसरों के बारे में हमेशा उत्सुक रही हैं। इसी से उन्हें अपने बिजनेस का आइडिया मिला।
ऑनलाइन मंगाएं समोसे
समोसा पार्टी ने आज समोसे खाने का तरीका बदल दिया है। आप समोसों के लिए लिए ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं और 30 मिनट में समोसा पार्टी आपको डिलीवरी करेगी। उनके समोसों का पहला स्टोर बैंगलोर में एक टेक-अवे दुकान के रूप में शुरू हुआ था, जहां आठ से नौ तरह के समोसे परोसे जाते थे। आज शहर की 15 लोकेशनों पर उनके समोसे उपलब्ध हैं। साथ ही फूड डिलीवरी मार्केटप्लेस और उनकी अपनी वेबसाइट भी उपलब्ध है।
50 लाख समोसे हर साल बेचते हैं
ये ब्रांड प्रति माह 50,000 ऑर्डर रिकॉर्ड करता है और इसके ग्राहक एक साल में लगभग 50 लाख समोसे खरीदते हैं, जिससे उनकी सालाना कमाई करोड़ों रु में रहती है। योअरस्टोरी.कॉम के अनुसार दीक्षा कहती हैं कि हमारे 80 फीसदी से ज्यादा ग्राहक रिपीट कस्टमर हैं। स्टार्टअप का मुनाफा बढ़ रहा है और इस साल अप्रैल में इसकी यूनिट गुड़गांव में लॉन्च की गयी। हालांकि कोरोना ने समोसा पार्टी को भी प्रभावित किया।
समोसों पर कोड
समोसों को यूनीक बनाने के लिए उन पर कोड भी दर्ज होता है। समोसा पार्टी के पास फिलिंग की 14 किस्में हैं, यानी वे 14 तरीके के समोसे तैयार करते हैं, तो इसलिए इन समोसों पर कोड दर्ज किया जाता है। दीक्षा के अनुसार यह एक बहुत बड़ा बाजार है। जब तक आप एक अच्छा उत्पाद लगातार देते रहेंगे, तब तक मांग हमेशा बनी रहेगी। वह कहती हैं कि एक स्टार्टअप के रूप में, वे अपने यूनिट इकोनॉमिक्स पर कड़ी नजर रखते हैं।
क्वालिटी पर खास ध्यान
दीक्षा के अनुसार वे लागत को लेकर सचेत नहीं हैं, मगर वे क्वालिटी के प्रति काफी सचेत हैं। उनके अनुसार एक फूड ब्रांड बनाना कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप एक साल में कर सकते हैं। इस स्टार्टअप ने पिछले साल इन्फ्लेक्शन प्वाइंट वेंचर्स से एक प्री-सीरीज़ ए राउंड में अज्ञात राशि जुटाई और अब कुछ और शहरों में बड़े पैमाने पर बिजनेस का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। ये स्टार्टअप ग्रोथ के फेज में है। दीक्षा के अनुसार वे एक ऐसा ब्रांड बनाना चाहते हैं जिसे सभी चैनलों पर महसूस किया जा सके, देखा और अनुभव किया जा सके।
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