नई दिल्ली, सितंबर 02। लोग अपनी रिटायरमेंट लाइफ काफी बोर होकर गुजारते हैं। आपने भी बहुत कम ऐसे लोग देखे होंगे, जो रिटायर होने के बाद कुछ नया करने की सोचें। बेंगलुरु की रहने वाली सुचिता उल्लाल ऐसे लोगों में से हैं, जिन्होंने रिटायर होने के बाद कुछ नया करने की सोची और एक बिजनेस खड़ा कर लिया। रिटारमेंट के बाद 64 वर्षीय उल्लाल और उनके पति प्रदीप उल्लाल काफी हद तक व्यस्त रहते हैं। वे अपने बिजनेस से अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं। जानते हैं उनके बिजनेस की डिटेल।
क्या है उनका बिजनेस
एक पूर्व पीआर और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन स्पेशियलिस्ट सुचिता 5 साल पहले रिटायर हुई थीं। द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वह या तो बेंगलुरु में वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक टिफिन सर्विस शुरू करना चाहती थी या नेचुरल सोप बनाना सीखना चाहती थीं। वे नेचुरल साबुन बनाना सीखने के लिए किसी वर्कशॉप की तलाश में थीं। उनका बेटा, जो उस समय स्विट्ज़रलैंड में था, हमेशा भारत से एक चीज़ भेजने के लिए कहता था और वो भी नेचुरल सोप।
कितना किया शुरुआती निवेश
वे अपने बेटे को दर्जन भर नेचुरल साबुन खरीदकर भेज देती, मगर हमेशा सोचती थीं कि मैं ऐसी साबुन क्यों नहीं बना सकती। फिर उन्होंने साबुन बनाने की क्लास में दाखिला लेने का फैसला किया, जिसने उसकी जिंदगी बदल दी। जब वे वर्कशॉप में शामिल हुईं तो उनका इरादा कभी भी बिजने शुरू करने का नहीं था। बिजनेस कुछ ऐसा था जो 'हो गया'। लगभग 15,000 रुपये के शुरुआती निवेश के साथ उनके वेंचर की शुरुआत हुई।
1 साल की ऑनलाइन रिसर्च
सुचिता के अनुसार उन्होंने वर्कशॉप में भाग लिया, साबुन बनाने का मजा लिया और अगला एक वर्ष ऑनलाइन रिसर्च करने में बिताया। उनके मुताबिक यह एक दिलचस्प समय रहा, क्योंकि उन्होंने बहुत समय साबुन बनाने और असफल होने में बिताया। एक वर्ष के अंत में सुचिता के पास साल भर के प्रयोग से 100 अजीब साबुन बचे थे। 2016 में, उनका बिजनेस एक छोटे बाजार में शुरू हुआ, जहां उन्होंने एक स्टॉल लिया।
कितनी है कमाई
कुछ बेस्टसेलर साबुनों में चारकोल, चंदन सोप, कस्तूरी मंजल (हल्दी), टेंडर नारियल साबुन और आड़ू, एक क्रीम एक और एक हिमालयन गुलाबी नमक बार शामिल है, जो सुचिता की पसंदीदा है। 100 ग्राम साबुन बार की कीमत 120 रुपये से अधिक होती है, जिसमें सबसे महंगा साबुन बार 200 रुपये का है। ये साबुन जो सुचिता के इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पर बेचे जाते हैं। वे महीने में 500 साबुन बेच देती हैं। अगर 120 रु वाली साबुन से भी देखा जाए तो हर महीने उनकी कमाई कम से कम 60 हजार रु है।
अच्छा रेस्पोंस मिला
सुचिता के इस उद्यम (सुचीज) की कामयाबी के पीछे अहम कारण रहा लोगों की तरफ से लगातार सकारात्मक रेस्पोंस। वह कहती हैं यह केवल त्वचा को कोमल और क्लियर महसूस करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें माताएं बताती हैं कि इससे उनके बच्चे की त्वचा को बेहतर रखने में मदद मिली है। बस इसी रेस्पोंस और उनकी सद्भावना ने सुची को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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