नई दिल्ली, मार्च 20। हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य का बजट पेश किया था। वे बजट के डॉक्यूमेंट्स गोबर से बने एक ब्रीफकेस में लाए थे। इस बैग की खूब चर्चा हुई। मगर क्या आप जानते हैं कि यह बैग किसने तैयार किया? रायपुर की ऑर्गेनाइजेश है 'एक पहल'। इसी ने ये बैग तैयार किया। इसके फाउंडर हैं रितेश अग्रवाल। रितेश ने अपनी टीम के साथ 10 दिनों में इस बैग को तैयार किया था। अहम बात यह है कि रितेश करीब 3 साल से गाय के गोबर से बने कई प्रोडक्ट बना रहे हैं और खूब पैसा भी कमा रहे हैं। आगे जानिए उनकी कहानी।
क्या क्या प्रोडक्ट बना रहे
रितेश गोबर से चप्पल, पर्स, बैग, मूर्तियां, दीये, ईंट और पेंट आदि बना और बेच रहे हैं। इतना ही नहीं होली पर उन्होंने गोबर से ईको फ्रेंडली अबीर और गुलाल भी तैयार करके बेचा। मजे की बात यह है कि वे गोबर के इन उत्पादों से हर महीने करीब 3 लाख रु कमा रहे। इतना ही नहीं उनके पास 23 लोग काम भी करते हैं। यानी वे खुद अच्छी कमाई तो कर ही रहे हैं, साथ ही दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।
नौकरी छोड़ने का फैसला
रितेश 41 साल के हैं और उन्होंने रायपुर से पढ़ाई की है। 2003 में उन्होंने ग्रेजुएशन की और फिर कई कंपनियों में जॉब की। मगर उनके मन में समाज के लिए कुछ करने का विचार आया। वे सड़कों पर गायों को देखते, जो कचरा खाने से बीमार होतीं। इसीलिए उन्होंने 2015 में नौकरी छोड़ कर एक गोशाला बनाई। इससे वे 3 साल तक जुड़े रहे।
प्रोडक्ट बनाने सीखे
जब रितेश गो सेवा कर रहे थे तो उन्होंने कई प्रोजेक्ट पर भी काम किया। फिर 2018-19 में छत्तीसगढ़ सरकार ने गोठान शुरू किए। उन्होंने एक गोठान से जुड़ने का फैसला किया और गोबर से ईको-फ्रेंडली प्रोडक्ट तैयार करने की योजना बनाई। उन्होंने इसकी ट्रेनिंग ली। इसके लिए वे जयपुर और हिमाचल प्रदेश में गए। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार रितेश ने गोबर से बनने वाले प्रोडक्ट और उनकी प्रोसेस से जुड़ी हुई जानकारी जुटाई।
क्या-क्या होता है तैयार
रितेश जब वापस रायपुर आए तो कुछ लोगों को अपने साथ जोड़ा और एक समूह बनाया। महिलाओं को भी शामिल किया गया। उन लोगों को रितेश ने कई प्रोडक्ट बनाने सिखाए। गोबर से मूर्तियां, दीये और ईंट भी बनाई। छत्तीसगढ़ के साथ साथ रितेश के उत्पाद कई राज्यों में भेजे जाने लगे। उनके प्रोडक्ट्स खूब पहचाने जाने लगे और रितेश की कमाई बढ़ने लगी।
खूब बढ़ रहा कारोबार
रितेश के प्रोडक्ट की मांग बढ़ रही थी। इसी के मद्देनजर उन्होंने अपने काम का भी विस्तार किया। उन्होंने गोबर से कई रंग भी बनाए और वो भी ईको-फ्रेंडली। 300 रुपए प्रति किलो कीमत वाले इन रंगों की उन्होंने देश भर में मार्केटिंग की। आज उनके साथ महिलाएं और पुरुष दोनों मिल कर काम करते हैं। उनके पास 400 से ज्यादा गाय हैं। गोबर से लकड़ी भी बनती है। ये काम आप भी कर सकते हैं। इसके लिए एक खास मशीन आती है, जो गोबर को सुखाती है।
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