नयी दिल्ली। सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के लोन की घोषणा की थी। सरकार का उद्देश्य इस लोन से करीब 45 लाख एमएसएमई को फायदा पहुंचाना है, जो पिछले साल से ही लिक्विडिटी का सामना कर रही हैं। आंकड़ों को मुताबिक सरकारी बैंक 12000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन आंवटित भी कर चुके हैं। इसके अलावा हजारों करोड़ रुपये का लोन पास किया जा चुका है। मगगर अभी भी बहुत सी एमएसएमई को लोन मिलने दिक्कतें आ रही हैं। चेन्नई स्थित अखिल भारतीय निर्माता संगठन (एआईएमओ) द्वारा शुरू किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे में पाया गया है कि एमएसएमई सरकार के क्रेडिट पैकेज का लाभ उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
क्यों आ रही दिक्कत
जिन लोगों को लोन मिला है उनका कहना है कि 2019-20 के लिए ऑडिटेड बैलेंस शीट सहित कागजी कार्यवाही बहुत लंबी है। लोन लेने वालों को प्रोजेक्शन स्टेटमेंट और यूटिलाइजेशन दस्तावेज भी पेश करने हैं। इसके अलावा प्रतिबंधात्मक पात्रता मानदंड (आपको अगले 60 दिनों के भीतर ब्याज या मूल भुगतान के जरिए अपने बैंक के साथ एक लोन लेनदेन करना होगा) लोन चाहने वालों के लिए एक बड़ी दिक्कत है। इतना ही नहीं इस तरह रिपोर्ट में सामने आईं कि बैंकों द्वारा केवल 10 प्रतिशत लोन की दे रहे हैं, जबकि ग्राहकों को अपने बकाया के 20 प्रतिशत की आवश्यकता थी, जिसकी गारंटी सरकार ने दी है।
लोन के लिए जवाब भी नहीं मिल रहा
एआईएमओ के अनुसार लोन आवेदनों की प्रोसेसिंग में देरी की शिकायतें भी मिली हैं। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें इस योजना के तहत लोन के लिए किए गए आवेदन के लिए हां या नहीं का जवाब भी नहीं मिल रहा है। यहां तक कि आवेदन के 15 दिनों के बाद भी उन्हें बैंक से कोई जवाब नहीं मिल रहा। जबकि कुछ का कहना है कि बैंक लोन प्रोसेस करने में हिचक रहे हैं। इस तरह की भी रिपोर्ट हैं कि बैंक केवल उन्हें लोन दे रहे हैं जिन्होंने अपने मौजूदा लोन के लिए अतिरिक्त सिक्योरिटी की पेशकश की है। जिन लोगों ने ऐसा नहीं किया उन्हें लोन मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
एमएसएमई का दायरा बढ़ा
यूनियन कैबिनेट ने महीने की शुरुआत हुई अपनी बैठक में एमएसएमई सेक्टर का विस्तार करते हुए कुछ फैसलों पर मुहर लगा दी थी। एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव को मंजूरी दे दी गई थी। मध्यम उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये कर दिया गया। वहीं 1 करोड़ रुपये के निवेश और 5 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले उद्यमों को अब सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा। 10 करोड़ रुपये से कम के निवेश और 50 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबार को अब छोटे उद्यमों की कैटेगरी में रखा जाएगा। वहीं 50 करोड़ रुपये के निवेश और 250 करोड़ रुपये के कारोबार वाली इकाइयों को मध्यम उद्यम माना जाएगा।
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