ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारत की IT कंपनियों पर बुरा असर पड़ेगा,क्या ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारतीय IT पेशवरों की नौकरी पर खतरा आएगा? ऐसे कई सवाल हैं जो इन दिनों IT इंडस्ट्री में गूंज रहे हैं।
क्या डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारत की आईटी कंपनियों पर बुरा असर पड़ेगा, क्या ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भारतीय आईटी पेशवरों की नौकरी पर खतरा आएगा? ऐसे कई सवाल हैं जो इन दिनों भारत और अमेरिका की आईटी इंडस्ट्री में गूंज रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप भले ही इस वक्त भारत की तारीफ करते नहीं थक रहे हों लेकिन कुछ वक्त पहले उन्होंने ने ही भारत के आईटी पेशेवरों पर अमेरिकी युवाओं की नौकरियां हड़पने का आरोप लगाया था, साथ ही एच-1बी वीजा को लेकर सख्ती दिखाने की बात कही थी।
क्या है एच-1बी वीजा
अमेरिका के इमीग्रेशन एण्ड नैशनॅलिटी ऐक्ट के तहत एच-1बी वीजा दिया जाता है। यह वीजा गैर-आप्रवासी वीजा है और यह अमेरिका की नौकरी प्रदाता कंपनियों को अस्थाई तौर पर आउटसोर्स करके कुशल नौकरीपेशा युवाओं को रोजगार देने की सुविधा देता है।
भारत के लिए संवेदनशील है मामला
एच-1बी वीजा मामला भारतीयों के लिए बहुत संवेदनशील है। भारतीय आईटी इंडस्ट्रीज से हर साल लाखों की तादात में आईटी पेशेवर अमेरिका में नौकरी के लिए जाते हैं। वहां एच-1बी वीजा इनकी नौकरी में सहायक होता है। वहीं अमेरिकी रिसर्च एजेंसियों ने इस वीजा के संबंध में आकड़े जुटाते हुए रिपोर्ट दी कि, आउटसोर्स के चलते अमेरिका में स्थानीय लोगों की नौकरी पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहीं अब डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने पर इस वीजा को खत्म करने या फिर और कड़ाई के साथ इसे लागू करने की बात कही है।
क्या कहा था ट्रंप ने
ट्रंप ने 14 अक्टूबर को सिनसिनाटी, ओहियो में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि देशभर में तमाम बच्चों की मां इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके बच्चों को नौकरी नहीं मिलेगी, उनकी चिंता जायज है। सबसे बड़ा खतरा आउटसोर्सिंग का है। कॉलेज शिक्षित बच्चों की नौकरियां दूसरे देशों को भेज दी गई हैं।' उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनियां एच1बी वीजा पर सस्ता श्रमबल आयात कर रही हैं। उन्होंने अमेरिकियों की नौकरियों का संरक्षण करने की प्रतिबद्धता जताई। IT पेशेवरों विशेषरूप से भारत से। आपको बता दें कि भारतियों के बीच एच-1बी कार्य वीजा काफी लोकप्रिय है।
एच-1बी वीजा के लिए इस साल 2.5 लाख से ज्यादा आवेदव
अमेरिकन इमीग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, बिल स्टॉक ने कहा, उन्हें पिछले साल 2.30 लाख एच-1बी वीजा आवेदन मिले थे, उन्होंने बताया कि इस साल यह अधिक होगा, उनका मानना है कि इस साल 2.50 एच-1बी आवेदन मिले। वहीं हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारी के प्रमुख दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार माना कि वह अपनी कंपनियों में उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए अमेरिकी प्रशासन के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का लाभ लेते हैं। पर उन्होंने कहा कि यह सुविधा खत्म होनी चाहिए, क्योंकि यह अमेरिकी कर्मचारियों के साथ ‘बड़ा अन्याय' है, क्योंकि इससे उनके रोजगार के अवसर मारे जाते हैं।
डिज्नी ने भारतीयों को रखा
हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि, एनिमेशन फिल्म बनाने वाली कंपनी वाल्ट डिज्नी ने 250 कर्मचारियों को हटाकर भारतीयों को नौकरी दी। जिन भारतीयों को डिज्नी ने काम दिया है वह सभी एच-1बी वीजा धारक हैं। वाल्ट डिज्नी ने ऐसे वक्त भारतीयों को नौकरी पर रखा जब अमेरिका में एच-1बी वीजा पर बहस गर्म थी।
ट्रंप की जीत का पड़ेगा बुरा असर
जाहिर है, अगर जीत के बाद ट्रंप एच-1बी वीजा पर सख्त रुख अपनाते हैं तो भारत की आईटी एजेंसियों पर बुरा असर तो पड़ेगा ही साथ ही रोजगार का संकट भी खड़ा हो सकता है। भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की ट्रंप की बात मानी जा सकती है लेकिन उसके लिए भारतीय रोजगार की बलि दी जाए, ये कतई मंजूर नहीं है। वहीं एबीसी न्यूज के ओपीनीयन पोल में वोटिंग से ठीक पहले ट्रंप हिलेरी से आगे निकल गए हैं। अमेरिका में 45 फीसदी लोग हिलेरी को राष्ट्रपति बनते देखना चाहते हैं तो वहीं 46 फीसदी लोग ट्रंप के पक्ष में है।
ओपीनियन पोल में ट्रंप आगे
जाहिर है, अगर जीत के बाद ट्रंप एच-1बी वीजा पर सख्त रुख अपनाते हैं तो भारत की आईटी एजेंसियों पर बुरा असर तो पड़ेगा ही साथ ही रोजगार का संकट भी खड़ा हो सकता है। भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की ट्रंप की बात मानी जा सकती है लेकिन उसके लिए भारतीय रोजगार की बलि दी जाए, ये कतई मंजूर नहीं है। वहीं एबीसी न्यूज के ओपीनीयन पोल में वोटिंग से ठीक पहले ट्रंप हिलेरी से आगे निकल गए हैं। अमेरिका में 45 फीसदी लोग हिलेरी को राष्ट्रपति बनते देखना चाहते हैं तो वहीं 46 फीसदी लोग ट्रंप के पक्ष में है।
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