केंद्र सरकार जल्द ही शराब को जीएसटी के अंतरगत ला सकती है। जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में इस बात पर फैसला लिया जा सकता है। शराब बनाने में प्रयोग किए जाने वाले एक पदार्थ पर सरकार जीएसटी की दरें कम करके शराब को जीएसटी के अंतर्गत ला सकती है।
क्या है ENA?
ENA यानि कि एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहॉल का प्रयोग शराब बनाने में किया जाता है। इसकी बहुत थोड़ी सी मात्रा से शराब बनाई जाती है। एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहॉल यानि कि ईएनए मानवीय उपयोग में लाए जाने के योग्य होती है।
घट सकती हैं शराब की दरें
एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहॉल यानि कि ईएनए पर जीएसटी लगाने का सरकार का ये दूसरा प्रयास होगा। इससे पहले सरकार ने जब एल्कोहॉल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए प्रयास किया था तो उसे राज्यों के विरोध का सामना करना पड़ा था। अब तक शराब पर वैट टैक्स और बिक्री कर दोनों ही लगाए जाते थे साथ ही राज्य का आबकारी विभाग शराब की दरें टैक्स लगाने के बाद तय करता था। अब जीएसटी के बाद शराब की दरें घट सकती हैं।
कहां होता है ईएनए का प्रयोग
एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहॉल यानि कि ईएनए का 70 प्रतिशत तक इस्तेमाल शराब बनाने में होता है। इससे व्हिस्की, रम और बियर आदि एल्कोहॉलिक पेय बनाए जाते हैं। शेष 30 प्रतिशत ईएनए का प्रयोग दवा या फिर सौंदर्य प्रसाधन बनाने के काम में लाया जाता है।
18% जीएसटी लगाने पर विचार
सरकार की मंशा है कि वह ईएनए पर 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगाए। इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह-मशवरा किया है। उनके मुताबिक ईएनए पर जीएसटी लागू हो सकता है, क्योंकि ये सीधे पीने वाली शराब नहीं है बल्कि इसका प्रयोग शराब बनाने में किया जाता है।
शराब पर जीएसटी के पक्ष में नहीं है कुछ राज्य
बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित खबर के मुताबिक, विपक्ष शासित राज्यों का इस पर कड़ा रुख है। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने तर्क दिया कि अगर ईएनए को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो इसे अल्कोहल पर कर लगाने के रूप में देखा जाएगा। राज्य सरकारें इस समय ईटीए पर मूल्यवर्धित कर और बिक्री कर लगाती हैं।
'ENA को जीएसटी में शामिल करना गलत'
बिजनेस स्टैंडर्ड पोर्टल ने आगे लिखा है कि, ईएनए को जीएसटी के दायरे में लाए जाने से पीने योग्य शराब को भी इसमें शामिल किए जाने को बल मिलेगा। उद्योग जगत के एक विशेषज्ञ ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'ईएनए को शामिल किए जाने का मतलब यह हुआ कि यह जीएसटी के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। इससे कर का बोझ बढ़ेगा। आदर्श रूप में इनपुट और आउटपुट पर एक समान कर होना चाहिए।'
डिस्क्लेमर
Hindi.goodreturns.in किसी भी तरह से शराब का समर्थन नहीं करता है। इस खबर में किसी भी तरह से शराब का प्रचार नहीं किया गया है। ये समाचार सिर्फ सूचनार्थ है, जो कि मुख्यत: जीएसटी समाचार पर आधारित है।
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