मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (financial year) के लिए पूर्व-सीमांकन स्तर (pre-demonetisation levels) तक आयकर अनुपालन (Income tax compliance) में काफी गिरावट की संभावना है।
नई दिल्ली: मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (financial year) के लिए पूर्व-सीमांकन स्तर (pre-demonetisation levels) तक आयकर अनुपालन (Income tax compliance) में काफी गिरावट की संभावना है। बता दें कि यह चार साल में पहली बार गिरावट आई है क्योंकि सरकार इस तथ्य पर खुद को थपथपाना (patting itself) रही है कि विमुद्रीकरण (Demonetization) ने आधार को बढ़ाने में मदद की है।

हालांकि अब तक, आयकरदाताओं (Income tax payers) के अनुपालन स्तर ने 2018-19 में 2017-18 में 91.6% से 13.7% की वार्षिक गिरावट आई इस बात की जानकारी आई-टी विभाग (IT department) के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण में दिखाया गया है। बता दें कि यहां तक कि दाखिल करने की अंतिम तिथि जुलाई के अंत के रूप में निर्धारित की गई है, हालांकि विशेषज्ञ देश के आम चुनावों में व्यस्त होने के कारण फाइलिंग में बहुत अधिक वृद्धि नहीं करते हैं।
स्पेक्ट्रम के विश्लेषकों ने इस तथ्य के लिए घटना को जिम्मेदार ठहराया है कि सरकार मध्यम वर्ग के मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावों के निर्माण में चुनावों के अनुपालन पर सख्त नहीं रही है। बता दें कि "सरकार आम चुनावों (Government general elections) को ध्यान में रखते हुए, अनुपालन पर बहुत सख्त नहीं रही है। जानकारी दें कि मध्य वर्ग मतदाताओं (Voters) का एक बड़ा हिस्सा योगदान देता है।
हालांकि शहरी मध्यम वर्ग के मतदाताओं को परंपरागत रूप से अवलंबी भाजपा (Incumbent BJP) के मूल आधार के रूप में देखा गया है। वहीं अन्य विश्लेषकों के अनुसार, देश में पहली बार फाइलरों के विखंडन के बाद के विमुद्रीकरण (Demonetization) को भी देखा जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अनुपालन (As a result compliance) में गिरावट आई है।
दो वर्षों के बाद के प्रदर्शन में, देश ने अनुपालन स्तरों में एकल अंकों की वृद्धि देखी थी। 2017-18 में, अनुपालन स्तर आश्चर्यजनक रूप से 91.6% था, जो 2016-17 में 85.1% से 7.7% था। जबकि 2016-17 के दौरान, अनुपालन स्तर 2.5% वर्ष-दर-वर्ष (वाई-ऑन-वाई) से 85.1% तक बढ़ गया था। टैक्स विश्लेषक (Tax analyst) की माने तो यह हम सभी के लिए एक आश्चर्य के रूप में आ रहा है। आदर्श रूप से, नोट बंदी के बाद संख्या बढ़नी चाहिए थी।
वहीं सरकार (Government) के लिए इससे ज्यादा चिंता की बात और क्या हो सकती है कि आयकर (Incometax) के कुल दाखिलों में गिरावट है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 66.8 लाख लोगों ने I-T रिटर्न दाखिल (Return filing) किया है - जो कि 2017-18 में I-T विभाग को प्राप्त 68.5 लाख फाइलिंग (Filing) से 1% कम है, डेटा I-T विभाग के वेबसाइट शो में पोस्ट किया गया है। आपको बता दें कि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे राजस्व पर दबाव पड़ेगा।
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