नई दिल्ली, मार्च 16। लगभग 700 निवेशकों के हाई वैल्यू वाले क्रिप्टो लेनदेन आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं। आयकर विभाग अब इन निवेशकों को नोटिस देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इन लोगों या संस्थाओं को 30 फीसदी टैक्स, जुर्माना और ब्याज का सामना करना पड़ सकता है। आयकर अधिकारियों ने इनमें से अधिकांश परिस्थितियों का उल्लेख उन ग्राहकों से किया गया है जिन्होंने टैक्स रिटर्न में क्रिप्टो गुड पॉइंट्स को छोड़ दिया है या किसी भी तरह से रिटर्न दाखिल नहीं किया है।
नहीं दे रहे टैक्स
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेशन (सीबीडीटी) के पास क्रिप्टो एसेट्स में लेनदेन करने वाले ऐसे लोगों की एक लंबी लिस्ट है जो टैक्स का भुगतान नहीं कर रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में करीब 700 ट्रांजैक्शन को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टैक्स लायबिलिटी बहुत ज्यादा है।
छात्र और गृहिणियां भी शामिल
दिलचस्प बात यह है कि हाई नेटवर्थ वाले लोगों (एचएनआई), अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और स्टार्टअप्स के अलावा इस लिस्ट में ऐसे छात्र और गृहिणियां (हाउस वाइफ) भी शामिल हैं, जिन्होंने कभी रिटर्न दाखिल नहीं किया है। विभाग इस बात को भी एनालाइज कर रहा है कि टैक्स के जाल से बचने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। यानी कहीं ऐसा तो नहीं किसी और ने इनके नाम पर क्रिप्टो खरीदे।
30 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव
अपने 1 फरवरी के वित्त में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टो मुद्राओं, क्रिप्टो सामानों और डिजिटल एसेट्स से प्रोफिट पर 30 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव रखा। ध्यान रहे कि इन पर एक फ्लैट टैक्स रेट लागू होगी, भले ही किसी व्यक्ति के पास डिजिटल एसेट्स कितनी भी हो। अधिकारियों ने उल्लेख किया कि ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें प्रोफिट 40 लाख रु से अधिक है, लेकिन लोगों ने रिटर्न दाखिल नहीं किया है या जीरो इनकम के साथ रिटर्न दाखिल किया है।
नहीं घोषित कर रहे इनकम
पिछले महीने एक इंटरव्यू में सीबीडीटी के चेयरमैन जेबी महापात्रा ने कहा था कि क्रिप्टो विदेशी मुद्रा में बड़ी संख्या में निवेशक कमाई की घोषणा नहीं कर रहे और इनकम टैक्स विभाग ने उनके बारे में पर्याप्त जानकारी जुटा ली है। उन्होंने कहा था कि विभाग 31 मार्च के बाद कार्रवाई करेगा। टैक्स अधिकारियों ने कहा कि फाइनेंस में घोषित क्रिप्टो संपत्ति के लिए नए दिशानिर्देशों के तहत शुल्क लगाने के अलावा विभाग जुर्माना भी लगा सकता है, जो टैक्स के ऊपर लगेगा और ऊपर 50 फीसदी तक जा सकता है।
सरकार का बड़ा बयान
सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी पेश करने की कोई योजना नहीं है। ये जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में दी। उन्होंने एक लिखित उत्तर में कहा कि वर्तमान में भारत में क्रिप्टोकरेंसी अनरेगुलेटेड है। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी जारी नहीं करता है। पारंपरिक कागजी करेंसी एक लीगल टेंडर है और आरबीआई द्वारा आरबीआई अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के अनुसार ये जारी की जाती है। पारंपरिक कागजी करेंसी के एक डिजिटल वर्जन को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) कहा जाता है। आरबीआई वर्तमान में सीबीडीसी की शुरुआत के लिए एक चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति की दिशा में काम कर रहा है।
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