Atma Nirbhar Bharat: भारत सरकार एग्रीकल्चर को काफी बड़े पैमाने में बेहतर करने के प्रयास में अग्रसर है, इसी कड़ी में क्या भारत दालों में आत्मनिर्भर बनने जा रहा है। भारत विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है, भारत सरकार दलहन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने और दाल के आयात को कम हासिल करने के लिए काम कर रही है, ताकि भारत देश आत्मनिर्भर बन सके। भारत सरकार का लक्ष्य है, साल 2027 तक दलहन में आत्मनिर्भर हो जाए।
अर्जुन मुंडा ने ग्लोबल पल्स कन्फेडरेशन [GPC] और सहकारी संस्था नेफेड [NAFED] की ओर से आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, कि भारत की घरेलू दलहन उत्पादन में पहले के मुताबिक काफी ज्यादा प्रगति हुई है, अपने बयान में बताया कि साल 2014 के 1.7 करोड़ टन से कई गुणा ज्यादा हो चुका है। वहीं उन्होंने यह भी बताया इस साल 2.95 करोड़ टन के उत्पादन का लक्ष्य है। अर्जुन मुंडा ने बताया की अन्य दूसरी फसलों पर भी भारत सरकार आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है।

आपकि जानकारी के लिए बता दें भारत सरकार दलहन की कमी को पूरा करने के लिए देश सालाना लगभग 35 लाख टन दालों का आयात करता है। वहीं मुंडा ने इस आयोजन में बताया की भारत चना और कई दूसरी दालों में आत्मनिर्भर हो चुका है। भारत सरकार ने फसलों में लगने वाले बीजों की कई नई किस्में की जरूरत को बढ़ा दिया है, ताकि किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो फसल तैयार करने में वहीं भारत सरकार की ओर से किसानों को उड़द और अरहर की खेती बढ़ाने पर ज्यादा गौर करने के लिए कहा गया है।
क्या सरकार का दलहन को और बढ़ाने का लक्ष्य है
अर्जुन मुंडा ने बताया कि भारत सरकार दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए काफी ज्यादा बड़े स्तर पर कार्य करने की कोशिश कर रही है, सरकार की ओर से आई जानकारी के अनुसार दालों की खेती को बढ़ाने के लिए सरकार ने पूरा मेप तैयार कर लिया है। अर्जुन मुंडा ने बताया कि सरकार किसानों को अच्छे स्तर के बीजों को प्रदान करवा रही है, ताकि फसल और अच्छी उपज तैयार कर सके, वहीं यह भी बताया विकास अनुसंधान और खेती के मूल्यांकन के लिए उपग्रह इमेजरी जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।
वहीं इसके साथ ही भारत सरकार किसानों के लिए खेती में जरूरत पड़ने वाली चीजों पर भी नजर बनाए हुए, ताकि किसानों को हर चीज मुहैया करवाई जा सके। फसल लगाने के दौरान किसानों को सिंचाई खाद और अच्छे बीजों की जरूरत पड़ती है, जिससे किसान अपनी फसल लगाने के समय इफको में जाकर प्रदान कर सकते हैं।
किसान और दालों के दाम
भारत में अक्सर त्योहारों के समय में हर चीज की डिमांड बढ़ जाती है, उसी कड़ी में दालों की डिमांड भी बढ़ जाती है। हालांकि ऐसे में हम दालों में महंगाई भी देखते हैं, लेकिन लोग दालों की खरीदारी काफी ज्यादा करते हैं क्योंकि घरों में पकवान बनाने में सबसे ज्यादा काम आती हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) के जरिए एमएसपी पर जो भी दलहन की खरीद होती है, उसी स्टॉक को ओपन मार्केट में कम कीमत में दे दिया जाता है। इससे भाव नीचे आते हैं और अन्य दलहन किसानों को बाजार में दाल की बिक्री के लिए अच्छी कीमत नहीं मिल पाती है।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 30 मार्च को सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश, निवेश और विकास पर बनी सहमति

LPG Cylinder Price Hike: युद्ध के बीच बड़ा झटका! आज से एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़े

Bank holiday Today: महावीर जयंती पर आज बैंक खुला रहेगा या बंद? जाने से पहले चेक करें RBI हॉलिडे लिस्ट



Click it and Unblock the Notifications