नई दिल्ली, जुलाई 14। भारत में लगातार को-ऑपरेटिव बैंक दिक्कतों से घिरे नजर आते हैं। अक्सर इनमें बड़े भ्रष्टाचार मिलते हैं और अंत में आरबीआई को इनको बंद करना पड़ता है। लेकिन अगर आपको लगता है कि केवल भारत में ही को-ऑपरेटिव बैंकों में यह सब होता है, तो आप गलत हैं। ऐसा दुनियाभर में होता है और हाल ही में एक साथ चीन में ऐसे 6 को-ऑपरेटिव बैंकों का मामला सामने आया है। इसके चलते चीन के लाखों लोगों का पैसा बैंक में फंस गया है। पैसा वापस न मिलने की सूरत में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है, और प्रशासन की तरफ सख्ती का दौर भी शुरू है। कुल मिलाकर चीन इस वक्त एक बड़ी बैंकिंग दिक्कत से घिर गया है। अगर यह दिक्कत बढ़ती है, तो चीन के बैंकिंग सिस्टम से चीन के लोगों का विश्वास उठ जाएगा। ऐसा इसलिए है कि चीन में पैसों के निवेश के केवल 2 ही माध्यम हैं। पहला है प्रापर्टी और दूसरा है बैंक में पैसा जमा करना। प्रापर्टी बाजार का चीन में पहले ही बाजा बजा हुआ है और बैंकों का बाजा बजना शुरू हो गया है। चीन में कुल मिलाकर ऐसे को-ऑपरेटिव बैंकों की संख्या करीब 4000 बताई जा रही है। वहीं इन बैंकों की कुल एसेट देश की बैंकों की कुल आसेट का करीब 25 फीसदी माना जा रहा है। इसीलिए इस समस्या को गंभीर माना जा रहा है। वहीं यह प्रदर्शन हिंसक भी होते जा रहे हैं, जो कभी भी व्यापक हो सकते हैं। कुल मिलाकर यह चीन के अंदर फैले भ्रष्टाचार का ही एक रूप है।
पहले जानिए चीन के कौन से को-ऑपरेटिव बैंक हैं यह
चीन के यह 4 को-ऑपरेटिव बैंक बैंक हैं युझोउ शिनमिनशेंग विलेज बैंक, शांगकाई हुइमिन काउंटी बैंक, झेचेंग हुआंगहुई कम्युनिटी बैंक और कैफेंग का न्यू ओरिएंटल कंट्री बैंक। इन चारों बैंकों में करोड़ों अरबों रुपया लोगों का जमा है, जिसे बैंक खाताधारकों को निकालने से रोक दिया गया है। इसके चलते चीन में लोग सड़कों पर आ गए हैं। यह संकट में फंसे ज्यादातर बैंक ग्रामीण इलाकों के हैं। हेनान प्रांत के 4 बैंकों के कैश निकासी पर बैन लगा दिया गया है। लोग अपने बैंक खाते से पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं। वहीं इन बैंकों की वेबसाइट भी काम नहीं कर रही हैं। जानकारों के अनुसार हेनान और अनहुई प्रांत के 6 ग्रामीण बैंकों में घोटाले की भी बात सामने आई है। हालात इतने बदतर हैं कि झेंग्झौ शहर में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के बाहर करीब हजारों बैंक ग्राहक अपना पैसा वापस लेने के लिए हंगामे पर उतर आए।
ज्यादा ब्याज दर का लालच दिया गया
चनी के इन को-ऑपरेटिव बैंकों ने लोगों को ज्यादा ब्याज का लालच दिया। इसके चलते इन बैंकों में लोगों ने काफी पैसा जमा कराया। बाद में इन बैंकों ने यह पैसा ज्यादा ब्याज दर पर प्रापर्टी से जुड़ी कंपनियों को लोन के रूप में दे दिया। पहले प्रापर्टी कंपनियों में दिक्कत शुरू हुई, जिसका असर अब बैंकों पर आ रहा है।
जानिए अब कितना जमा पैसा मिलेगा वापस
जैसे भारत में नियम है कि अगर कोई बैंक बंद डूब जाएगा तो जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये का जमा ही वापस किया जाएगा। अगर किसी जमाकर्ता का इससे ज्यादा पैसा भारत में बैंकों में जमा है, तो वह डूब जाता है। ठीक इसी तरह का नियम चीन में भी है। चीन में नियम है अगर वहां पर बैंक डूब जाता है तो खाताधारक को अधिकतम 50,000 युआन (लगभग 7,400 अमरीकी डालर) का ही भुगतान किया जाएगा। अगर किसी खाताधारक का इससे ज्यादा पैसा बैंक में जमा है, तो वह डूब जाएगा। जानकारों ने बताया है कि चीन में जनता इसी लिए ज्यादा नाराज है कि उसका इन बैंकों में काफी ज्यादा पैसा जमा है, जो अब डूबना तय है। इसके अलावा 50,000 युआन कब से और कैसे मिलेगा यह भी साफ नहीं है।
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