नयी दिल्ली। अक्सर किसानों को फसल खराब होने के चलते भारी नुकसान होता है। किसानों की इसी समस्या को देखते हुए गुजरात सरकार ने एक खास योजना का ऐलान किया है। हाल ही में गुजरात सरकार ने किसानों के लिए एक खास योजना शुरू की है। गुजरात सरकार की इस योजना का नाम 'मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना' है, जिसेक तहत सूखे, ज्यादा बारिश या बिना मौसम वाली बारिश के चलते फसल का नुकसान होने पर किसानों को 1 लाख रु तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। अच्छी बात ये है कि किसानों को इसके लिए कोई भी प्रीमियम नहीं देना होगा। इस योजना से राज्य के 56 लाख किसानों को फायदा मिलेगा। योजना के तहत फसल खराब होने पर हर किसान को अधिकतम 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह लेगी ये योजना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह लेगी। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने ऐलान किया है कि केंद्र की फसल बीमा योजना से अलग किसानों को इस नई योजना के लिए कोई भी प्रीमियम नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि इस साल के लिए केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना को मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना के साथ बदला जा रहा है। दरअसल बीमा कंपनियों ने इस बार गुजरात सरकार से काफी अधिक प्रीमियम मांगा है। बीमा कंपनियों की मांग के अनुसार राज्य सरकार को 4500 करोड़ रु देने पड़ेंगे।
कितना मिलेगा मुआवजा
रूपाणी के अनुसार जून से नवंबर के बीच बाढ़ या बेमौसम बारिश के कारण किसानों की खरीफ की फसल कई बार बर्बाद हो जाती है तो सरकार चार हेक्टेयर का मुआवजा देगी। अधिकतम चार हेक्टेयर के लिए नुकसान 60 प्रतिशत फसल के खराब होने पर 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जाएगा। 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा 60 प्रतिशत से अधिक फसल के नुकसान पर दिया जाएगा। रूपाणी ने कहा कि औसतन 1800 करोड़ रुपये का प्रीमियम देना पड़ता है, जबकि इस बार बीमा कंपनियों ने हमसे 4500 करोड़ रुपये का प्रीमियम मांगा था। इसी को देखते हुए सरकार ने अपनी योजना शुरू कर दी।
यहां से भी मिल सकता है मुआवजा
मुख्यमंत्री रूपाणी ने साफ किया है कि नई योजना के तहत दिए जाने वाले मुआवजे के अलावा किसान प्राकृतिक आपदा की वजह से खराब हुई फसल के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत एक्स्ट्रा मुआवजा भी ले सकते हैं। उनके अनुसार एक समर्पित पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिससे किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वन अधिकार अधिनियम के तहत पंजीकृत आदिवासी किसानों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। मालूम हो कि राज्य सरकार ने पहले से ही फसल बीमा प्रीमियम का भुगतान करने के लिए 1,800 करोड़ रुपये अलग रखे थे। अब इसी पैसे का इस्तेमाल नई योजना के लिए होगा।
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