नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब पेट्रोल और डीजल पर 8 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क बढ़ा सकती है, क्योंकि सोमवार को संसद में पारित वित्त विधेयक में पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि की सीमा बढ़ाकर क्रमश: 18 रुपये और 12 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इनकी मौजूदा वृद्धि की सीमा पेट्रोल के लिए 10 रुपये और डीजल के लिए 4 रुपये प्रति लीटर है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई भारी गिरावट के बाद हाल ही में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर की दर से वृद्धि की थी। अब वित्त विधेयक 2020 में संशोधन के बाद सरकार को फिर उत्पाद शुल्क में वृद्धि करने की शक्ति मिल गई है।

फाइनेंस बिल पास होने से रास्ता साफ
फाइनेंस बिल से वित्तीय प्रस्ताव पारित फाइनेंस बिल से केंद्र सरकार के वित्तीय वर्ष 2020-21 के फाइनेंशियल प्रस्तावों का रास्ता साफ हो गया। केंद्रीय बजट 2020-2021 में, सरकार ने 2020-21 में 30,42,230 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा था, जो 2019-20 के संशोधित अनुमान से 12.7 प्रतिशत अधिक है। वहीं सरकार की प्राप्ति 16.3 प्रतिशत बढ़कर 22,45,893 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिकवाली है। सरकार ने 2020-21 में नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के 10 प्रतिशत का अनुमान लगाया है। 2019-20 के लिए नॉमिनल वृद्धि दर का अनुमान 12 प्रतिशत था।
हाल ही बढ़ाया गया था टैक्स
हाल ही में बढ़ाई एक्साइज ड्यूटी सरकार ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) बढ़ाने का ऐलान किया था। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर प्रति लीटर 3-3 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया था। इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य राजकोषीय घाटे की भरपाई करना बताया जा रहा था। सऊदी अरब और रूस के बीच शुरू प्राइस वॉर और कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार घट रही थीं, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम भी घट रहे हैं। केंद्र सरकार ने इसी मौके का फायदा उठाने के लिए इन दोनों ईंधन उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी।
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