नयी दिल्ली। लॉकडाउन के कारण बहुत सारे सेक्टरों में प्रोडक्शन ठप्प पड़ा है। इससे आने वाले समय में अगर लॉकडाउन में और राहत न दी गई तो आम लोगों को बहुत सारी चीजों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इन्हीं चीजों में एक है नमक। नमक की कमी से आने वाले कुछ महीनों में आपके खाने का स्वाद बिगड़ सकता है। दरअसल भारतीय तटों के आस-पास रहने वाले नमक किसान स्टॉक में कमी का अनुमान लगा रहे हैं, क्योंकि कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन से प्रोडक्शन साइकिल का एक बड़ा हिस्सा रुका हुआ है। यानी सीधे-सीधे नमक का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों की कमी, ट्रांसपोर्ट सेवा बंद और एक से दूसरे जिले में आने-जाने पर पांबदी ने उत्पादकों को नमक का उत्पादन कई स्तरों पर रोकने को मजबूर कर दिया है। बता दें कि देश में हर साल 95 लाख टन खाद्य नमक इस्तेमाल किया जाता है। जबकि इंडस्ट्री की मांग 110 से 130 लाख टन के बीच है। 58-60 लाख टन नमक उन देशों को निर्यात किया जाता है जो पूरी तरह से नमक के लिए भारत पर निर्भर हैं।
कहां और कब होता है नमक का अधिक का उत्पादन
नमक उत्पादन का बेस्ट टाइम अक्टूबर और मध्य जून तक रहता है। इसमें भी मार्च और अप्रैल में अधिकतम उत्पादन होता है। वहीं राज्यों के हिसाब से देखें तो गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में नमक उत्पादन का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा रहता है, जबकि महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कम मात्रा में नमक बनता है। इस लिहाज से हर साल राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 200 - 250 लाख टन नमक का उत्पादन होता है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भरत रावल, भारतीय नमक निर्माता संघ के अध्यक्ष, कहते हैं कि आधे मार्च और पूरे अप्रैल में नमक उत्पादन का नुकसान हुआ है, जिसमें बेस्ट सीजन के 40 से ज्यादा दिन शामिल हैं। नमक के सीजन में एक महीने उत्पादन रुकना किसी अन्य इंडस्ट्री के 4 महीनों के उत्पादन नुकसान के बराबर है।
कहां-कहां होता है नमक का इस्तेमाल
खाने के नमक के अलावा औद्योगिक नमक का उपयोग बिजली संयंत्रों, तेल रिफाइनरियों, सौर ऊर्जा कंपनियों, रासायनिक निर्माताओं, कपड़ा निर्माताओं, धातु ढलाई, फार्मास्यूटिकल्स, रबर और चमड़े के निर्माताओं द्वारा किया जाता है। रावल के मुताबिक हमें यकीन नहीं है कि हम खोए हुए उत्पादन समय की पूर्ति कर पाएंगे क्योंकि हमारे पास अब लगभग 45 दिन हैं। प्रत्येक उत्पादन चक्र में लगभग 60 से 80 दिन लगते हैं - जो किसी विशेष स्थान पर बारिश के स्तर पर निर्भर करता है। वे आगे बताते हैं कि अगर हम अगले कुछ दिनों में उत्पादन में वृद्धि नहीं कर पाते हैं, तो हमारा ऑफ सीजन (मानसून) बफर स्टॉक बहुत अधिक नहीं हो सकता। इसके अलावा अगर लॉकडाउन के बाद उद्योगों की तरफ से मांग में बढ़ोतरी होती है, तो यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
देरी से होने वाली बारिश से उम्मीद
केवल देरी से होने वाली बारिश नमक निर्माताओं को बचा सकती है। इसके अलावा शर्त ये भी है कि अगले दो महीनों में कई प्री-मॉनसून वर्षा या चक्रवात नहीं होने चाहिए। गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में नमक निर्माता पिछड़े जिलों या अन्य राज्यों से खेतों में काम करने वाले लोगों को काम पर लगाते हैं। आईएसएमए के सदस्यों का कहना है कि इनमें से कई कामगार अब अपने घरों को वापस चले गए हैं, जो नमक प्रोडक्शन में गिरावट का बड़ा कारण है।
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