MSME Classification Criteria: अगर आप छोटे कारोबारी है तो आपके लिए जरूरी खबर है। सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव कर दिया है। निवेश और टर्नओवर के अनुसार, एमएसएमई क्लासिफिकेशन किया जाएगा। इस आधार पर ये निर्धारित होगा कि कारोबार माइक्रो, स्माल और मीडियम इनमें से किस कैटेगरी में आएगा। ये नई परिभाषा 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। सरकार ने 1 फरवरी को पेश किए बजट में एमएसएमई के नियमों के बारे में जानकारी दी थी। इन नए नियमों के लागू होने के बाद अब एमएसएमई को नए तरीके से पहचाना जाएगा। इससे नए और छोटे कारोबारियों को काफी फायदा मिलेगा।

कंपनी में कितना हुआ है निवेश (MSME Classification From 1st April)
सरकार के द्वारा नए नियमों के तहत, एमएसएमई में निवेश और कारोबार की सीमा को बढ़ाया गया है। निवेश की सीमा को 2.5 गुना और कारोबार की सीमा को 2 गुना कर दिया गया है। इससे ज्यादा एमएसएमई सरकार की योजनाओं का फायदा उठा पाएंगे। अगर किसी कंपनी ने 2.5 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा।
इसके अलावा अगर कोई एमएसएमई ने 125 करोड़ रुपये तक का निवेश किया है तो मीडियम एंटरप्राइजेज के अंदर वह कंपनी आएगी। वहीं, स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए 25 करोड़ रुपये तक का निवेश निर्धारित तय किया गया है।
पहले इतना तय किय गया था कंपनी में निवेश (msme new rule)
पहले माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए निवेश की सीमा 1 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा मीडियम एंटरप्राइजेज की पहले 50 करोड़ रुपये तक सीमा निर्धारित की गई थी। स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए कंपनी में निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये थी।
कंपनी का कितना है टर्नओवर (MSME New Rules 1st April 2025)
स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपये कर दी गई है। अगर किसी माइक्रो एंटरप्राइजेज का टर्नओवर 10 करोड़ रुपये तक है तो उसे माइक्रो एंटरप्राइजेज माना जाएगा। मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए भी सीमा बढ़ाई गई है। इसे बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
एमएसएमई कंपनी के लिए पहले तय किया
माइक्रो के लिए पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी। स्मॉल के लिए 50 करोड़ रुपये टर्नओवर था। मीडियम के लिए यह सीमा 250 करोड़ रुपये थी।
वित्त मंत्री ने दी थी ये जानकारी
1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश किया था। उन्होंने एमएसएमई सेक्टर के बारे में जानकारी देते हुए बताय था कि आजकल 1 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई रजिस्टर्ड हैं। ये 7.5 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं और हमारे देश के मैन्युफैक्चरिंग का 36% हिस्सा हैं। ये एमएसएमई अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाते हैं और हमारे एक्सपोर्ट का 45% हिस्सा इन्हीं का है। इन्हें बढ़ावा देने के लिए और इनकी प्रगति के लिए साथ ही, टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने के लिए और आसानी से पैसे मिल सके, इसलिए इनके निवेश और टर्नओवर की सीमा को बढ़ाया गया है। इससे उन्हें आगे बढ़ने और युवाओं को नौकरी देने का हौसला मिलेगा। साथ ही एमएसएमई की ग्रोथ होगी।
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