नई दिल्ली, अक्टूबर 4। टैक्स चोरी से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल पनामा पेपर्स लीक के बाद टैक्स चोरी से जुड़े अहम दस्तावेजों का एक और संस्करण सामने आया है। इन्हें पैंडोरा पेपर्स कहा जा रहा है। पैंडोरा पेपर्स ऑफशोर फाइनेंशियल रिकॉर्ड के लेटेस्ट दस्तावेज हैं। इन्हें ऐसे दस्तावेजों का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बताया जा रहा है। इन दस्तावेजों में 29,000 ऑफशोर कंपनियों और ट्रस्टों के ओनरशिप की डिटेल के साथ ऑफशोर टैक्स हेवन में 14 कंपनियों के 1.2 करोड़ दस्तावेज़ हैं। इन दस्तावेजों को दो साल पहले इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने हासिल किया था।
सैकेड़ों भारतीयों के नाम
आईसीआईजे के हासिल करने के बाद भारत से जुड़े डेटा की द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा एक साल की जांच से पता चलता है कि इन दस्तावेजों में 300 से अधिक भारतीयों के नाम हैं। इन दस्तावेजों में 60 प्रमुख भारतीय व्यक्तियों और कंपनियों की ऑफशोर होल्डिंग्स की पुष्टि और जांच की गई है। दस्तावेजों में बताया गया है कि कैसे लोग और कंपनियां, जिनमें से कई पहले से ही जांच के दायरे में हैं, देश में कानूनी खामियों और टैक्स हेवन (अत्यंत कम कर वाले देश) के ढीले अधिकार क्षेत्र का उपयोग करके बच रहे थे।
इन बड़ी हस्तियों के नाम
द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच से पता चलता है कि अनिल अंबानी, जिन्हें ब्रिटेन की एक अदालत में दिवालिया घोषित किया गया है, के 18 ऑफशोर कंपनियां हैं। वहीं भगोड़े नीरव मोदी की बहन ने उनके भारत से भागने से ठीक एक महीने पहले एक ट्रस्ट बनाया। बायोकॉन के प्रमोटर किरण मजूमदार शॉ के पति ने एक ऐसे व्यक्ति के साथ एक ट्रस्ट की स्थापना की, जिसे सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए प्रतिबंधित किया था।
सचिन तेंदुलकर का भी नाम
स्पोर्ट्स आइकन सचिन तेंदुलकर ने पनामा पेपर्स का पर्दाफाश होने के तीन महीने बाद ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में अपनी यूनिट को बेचने के लिए कहा। पैंडोरा पेपर्स में अन्य प्रमुख भारतीय और अनिवासी भारतीयों के भी नाम हैं, जिन्होंने 2016 के डेटा लीक के बाद, अपनी ऑफशोर संपत्ति के रीऑर्गेनाइजेशन का विकल्प चुना है। भारतीय व्यवसायियों ने अपनी संपत्ति से कुछ हद तक अलग होने और लेनदारों से अपनी संपत्ति को बचाने के लिए ऑफशोर ट्रस्ट स्थापित किए हैं।
बनाया गया काफी तगड़ा नेटवर्क
आर्थिक अपराधों में आरोपी, और ऐसे लोग जिनके खिलाफ जांच चल रही है, ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स या पनामा जैसे बड़े टैक्स हेवन के अलावा, समोआ, बेलीज या कुक आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में एक ऑफशोर नेटवर्क बनाया है। पैंडोरा पेपर्स में जो नाम सामने आए हैं, उनमें से कई व्यक्ति और संस्थाएं भारत में जांच एजेंसियों के लिए नयी नहीं हैं। कुछ जेल में हैं और कई फिलहाल जमानत पर हैं।
कई बड़ी विदेशी हस्तियों के नाम
पैंडोरा पेपर्स में जॉर्डन के राजा, यूक्रेन, केन्या और इक्वाडोर के राष्ट्रपतियों, चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री और पूर्व ब्रिटिश प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर का नाम भी है। फाइलों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के "अनौपचारिक प्रचार मंत्री" और भारत, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और अन्य देशों के 130 से अधिक अरबपतियों की वित्तीय गतिविधियों की भी डिटेल है।
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