देश के प्रमुख शहरों में 20 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे का उछाल आया है। इससे पहले इसी हफ्ते तेल के दाम 3 रुपये तक बढ़ चुके हैं। कीमतों में इस बढ़ोतरी से आम जनता और ट्रांसपोर्ट कंपनियों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस तेजी की मुख्य वजह हैं। फिलहाल तेल की दरें ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हो रहे बदलावों के हिसाब से तय हो रही हैं।
तेल कंपनियां (OMCs) हर रोज सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी करती हैं। ये दाम कच्चे तेल की औसत कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को देखकर तय किए जाते हैं। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनियां अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए ये बदलाव करती हैं। सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल विदेशी सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों पर करीब से नजर रखे हुए हैं। लगातार बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार में सख्त प्राइसिंग स्ट्रैटेजी की ओर इशारा कर रही हैं।

20 मई: अपने शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट देखें
अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) की दरें अलग होने की वजह से तेल की कीमतें भी बदल जाती हैं। इसके अलावा रिफाइनरी से ढुलाई का खर्च भी पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाता है। लोकल टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से मुंबई में दिल्ली के मुकाबले तेल हमेशा महंगा रहता है। पेट्रोल पंप जाने से पहले ग्राहकों को ताजा रेट जरूर चेक कर लेने चाहिए। नीचे दी गई टेबल में देश के प्रमुख महानगरों के दाम दिए गए हैं।
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.62 | ₹90.45 |
| मुंबई | ₹106.71 | ₹95.21 |
| चेन्नई | ₹103.18 | ₹95.14 |
| कोलकाता | ₹104.55 | ₹93.20 |
ईंधन महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट के किराए पर पड़ता है। टैक्सी और बस ऑपरेटर अपना खर्च निकालने के लिए किराए में बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। यही नहीं, ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी भी अब महंगी हो सकती है। तेल के दाम बढ़ने से अक्सर फल-सब्जियों और अनाज की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए आम आदमी को अपने मंथली बजट में बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
पेट्रोल-डीजल पर वैट और एक्साइज ड्यूटी का गणित
केंद्र सरकार तेल पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जबकि राज्य सरकारें वैट वसूलती हैं। पेट्रोल-डीजल की कुल कीमत में इन टैक्सों का एक बड़ा हिस्सा होता है। जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो टैक्स का बोझ और ज्यादा महसूस होता है। हालांकि, कुछ राज्य जनता को राहत देने के लिए टैक्स घटा देते हैं, वहीं कुछ राज्य अपनी कल्याणकारी योजनाओं के लिए इसी रेवेन्यू पर निर्भर रहते हैं।
आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतें ग्लोबल मार्केट के रुख पर निर्भर करेंगी। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद निवेशक भी तेल कंपनियों के शेयरों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर रुपया स्थिर रहता है, तो कीमतों का दबाव कुछ कम हो सकता है। लोगों को अपने ट्रैवल बजट को मैनेज करने के लिए रोज बदलते दामों के प्रति अलर्ट रहना होगा। मौजूदा हालात बताते हैं कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में होने वाली हलचल का भारत पर कितना गहरा असर पड़ता है।


Click it and Unblock the Notifications