नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की किसानों को और कैश देने की तैयारी है। अभी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये मिलते हैं। यह पैसा 3 किस्तों में दिया जाता है। हर किस्त 2000 रुपये की होती है। जैसे ही यह 5000 रुपये और मिलने लगेगा तो किसानों को साल में कुल मिलाकर 11,000 रुपये मिलने लगेंगे। यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जाएगा। इसके चलते इस पैसे पर सरकारी अधिकारी और दलाल बंदरबांट नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं कि यह 5000 रुपये साल में कैसे और कितनी किस्त में दिया जाएगा।
ये है केन्द्र सरकार की योजना
केन्द सरकार की योजना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से करीब देश के ज्यादातर किसान जुड़ चुके हैं। ऐसे में अगर उनको खाद की सब्सिडी के रूप में हर साल 5000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में दे दिया जाए तो किसानों का काफी भला हो सकता है। अभी तक सब्सिडी का पैसा किसानों की जगह खाद बनाने वाली कंपनियों और खाद बेचने वाली सहकारी समितियों को दिया जाता है। इसके चलते किसानों को खाद मिलने में जहां दिक्कत होती है, वहीं भ्रष्टाचार भी होता है।
जानिए कितनी किस्त में मिलेगा किसानों को 5000 रुपये
केन्द्र सरकार किसानों की आमदीन दोगुनी करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि अगर फसल के समय पर किसान को आसानी से खाद मिल जाए तो उसकी जहां परेशानी कम होगी वही फसल भी अच्छी होगी। क्योंकि कई किसान सस्ती खात नहीं ले पाते हैं, जिससे उनकी फसल का नुकसान होता है। सरकार को जो सिफारिश की गई है, उसके हिसाब से किसानों को 2,500 रुपये की 2 किस्तों के रूप में साल में यह 5000 रुपये देने की बात है। इसमें पहली किस्त खरीफ की फसल के समय और दूसरी किस्त रबी की शुरुआत में देने की बात है।
ये है सिफारिश
कृषि लागत और मूल्य आयोग ने किसानों के बैंक खाते में सीधे 5,000 रुपये हर साल खाद सब्सिडी के तौर पर देने की सिफारिश की है। आयोग ने सिफारिशों में कहा है कि किसानों को 2,500 रुपये 2 किस्तों में दिए जाए। पहली किस्त खरीफ की फसल के समय और दूसरी किस्त रबी की शुरुआत में दिया जाए। इससे किसान बाजार से जहां से भी चाहे अपनी मर्जी से खाद खरीद सके और आराम से खेती कर सके। अगर इस सिफारिश के आधार पर किसानों को 5000 रुपये सालाना देना शुरू कर दिया गया तो खेती में भारी बदलाव आ सकता है। अभी कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी में भारी घोटाला होता है। हर साल सहकारी समितियों और भ्रष्च अधिकारियों की वजह से खाद की जरूरत के समय कमी ही बनी रहती है। ऐसे में किसानों को अक्सर ब्लैक में खाद खरीदना पड़ती है। लेकिन अगर सब्सिडी का पैसा सीधे किसान को मिल जाएगा तो वह बाजार से अपनी मर्जी से खाद खरीद सकेगा।
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