पिछले दो महीने से सब्जियों की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। यूं कहें कि सब्जियों ने पहले ही आम आदमी के खाना का स्वाद बिगाड़ रखा था। अब तो अब दालों की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।
नई दिल्ली: पिछले दो महीने से सब्जियों की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। यूं कहें कि सब्जियों ने पहले ही आम आदमी के खाना का स्वाद बिगाड़ रखा था। अब तो अब दालों की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। आम आदमी के लिए अब दाल-रोटी खाना भी पहुंच से बाहर हो गया है। कोरोना का कहर : अब महंगा हुआ खाने पीने का सामान, जानें बढ़े हुए रेट ये भी पढ़ें

पिछले एक महीने से दालों की थोक कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। अरहर दाल की कीमतें पहले 100 पूरी कर चुकी हैं और अब भी इनकी कीमतों में लगातार तेजी जारी है। ऐसे में त्योहारों पर दाम घटने की उम्मीद कम ही है। थोक बाजार में अरहल दाल की कीमत 115 रुपये किलो के पार पहुंच चुकी हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में दालों की कीमत 15 से 20 रुपये तक बढ़ चुकी है।
मूंग और उड़द दाल के दाम में भी तेजी
पिछले कुछ माह में इसकी कीमतों में 20 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है और करीब 10 फीसदी का इजाफा तो महज 1 महीने के अंदर ही हो गया है। इसके अलावा मूंग और उड़द दाल भी 10 फीसदी तक महंगी हो चुकी है।
चने की कीमतों में भी आया उछाल
वहीं लेकिन सबसे बड़ा उछाल चने की कीमतों में आया है जो एक महीने में करीब 40 फीसदी है। महंगी दाल की मार लोगों की जेब पर करीब 4 महीने तक पढ़ती रहेगी। 4 महीने बाद जब दालों की नई फसल आएगी तभी कीमतों में गिरावट दर्ज हो सकती है। वहीं होलसेलर्स की माने तो दाल की कीमतों में हुई वृद्धि की बड़ी वजह चने की कीमतें बढ़ना है। इसके साथ ही अगर मटर की दाल के इंपोर्ट पर लगा बैन हट जाता है तो चने की कीमतें नीचे आ जाएंगी और उसके साथ ही दालों की कीमतें भी कम हो जाएंगी।
बंपर पैदावार का अनुमान
पिछले साल इस अवधि में चना दाल की कीमत 70-80 रुपये प्रति किलो थी लेकिन इस बार यह 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। अरहर दाल 115 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारोबारियों की मांग है कि सरकारी एजेंसी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (नेफेड) को सप्लाई बढ़ाने के लिए अपना स्टॉक रिलीज करना चाहिए. सप्लाई में गिरावट आई है। जबकि, डिमांड लगातार बढ़ रही है। इसलिए कारोबारियों ने 2020-21 के लिए आयात कोटा जारी करने की मांग की है। हालांकि, सरकार का मानना है कि आपूर्ति की स्थिति ठीकठाक है और अगले तीन महीने में खरीफ सीजन की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाएगी। इस साल बंपर पैदावार का अनुमान है। जानकारी के मुताबिक भारत को उम्मीद है कि खरीफ सीजन में दालों का कुल उत्पादन 93 लाख टन होगा। अरहर का उत्पादन पिछले साल के 38.3 लाख टन के मुकाबले इस साल बढ़कर 40 लाख टन होने की उम्मीद है।
जानिए क्यों महंगी हो रही हैं दालें
बता दें कि कारोबारियों का कहना हैं कि लॉकडाउन के दौरान तुअर की कीमतें 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गईं, जो बाद में 82 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गईं। हालांकि, अब कीमत फिर से चढ़ने लगी है। त्योहारी सीजन की मांग के कारण दालों की मांग में तेजी आई है। व्यापारियों को डर है कि कर्नाटक में अरहर की फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान होगा। पैदावार में 10% का नुकसान हो सकता है। वहीं उम्मीद है कि जब तक नई फसल नहीं आएगी, तब तक कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। दुनिया के बाजारों में तुअर की कम उपलब्धता है, क्योंकि भारत के घरेलू तुअर में वृद्धि के बाद अंतरराष्ट्रीय किसानों ने अरहर से दूसरी फसलों की ओर रुख कर लिया है।
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