नयी दिल्ली। रिलायंस एक और बड़े दांव की तैयारी में है। कंपनी की योजना जियो प्लेटफॉर्म्स को विदेशी शेयर एक्सचेंजों पर लिस्ट करने की योजना है। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम सब्सिडिरी कंपनी है। रिलायंस जल्द ही जियो प्लेटफॉर्म्स में 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने और सरकार की तरफ से डायरेक्ट लिस्टिंग के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने के बाद विदेशी बाजारों में लिस्टिंग का प्रोसेस शुरू कर सकती है। बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसके चेयरमैन एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं, जियो प्लेटफॉर्म्स में 17.12 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को बेच कर 78,562 करोड़ रु हासिल कर चुकी है। जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन 4.91 लाख करोड़ रु का है।
लिस्टिंग के लिए जल्द आएंगे नए दिशानिर्देश
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सरकार की तरफ से डायरेक्ट अंतरराष्ट्रीय लिस्टिंग के लिए नए दिशानिर्देशों की घोषणा करते ही कंपनी विभिन्न वैश्विक शेयर बाजारों का रुख करेगी। 17 मई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारतीय कंपनियों को भारतीय शेयर बाजार में एक साथ सूचीबद्ध किए बिना डायरेक्ट विदेशी लिस्टिंग की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए दिशानिर्देशों अभी भी काम जारी है। हालांकि रिलायंस किस एक्सचेंज को चुनेगी ये अभी साफ नहीं है, मगर अमेरिकी एक्सचेंज नैस्डैक, टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए एक्सचेंज, को तरजीह दी जा सकती है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के लिए किए गए सौदे
जियो प्लेटफॉर्म्स के रिलायंस ने सबसे पहला सौदा अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के साथ 22 अप्रैल को किया, जिसने इसकी 9.99 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विभिन्न निजी इक्विटी कंपनियों, जैसे कि सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक और केकेआर को 7.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची। इन सभी ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.15 से लेकर 2.32 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदी। सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश फंड और अबू धाबी की मुबाडला इन्वेस्टमेंट जैसे निवेशक भी जियो प्लेटफार्म्स में इसी तरह की थोड़ी थोड़ी हिस्सेदारी खरीद सकते हैं।
क्या है रिलायंस का टार्गेट
दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मालिक मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी को मार्च 2021 तक "शून्य कर्ज" वाली कंपनी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसीलिए कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के लिए ताबड़तोड़ डील कर रही है। इतना ही नहीं कर्ज कम करने के लिए ही रिलायंस 30 सालों में पहली बार राइट्स इश्यू लाई है। जिसके जरिए कंपनी 53,125 करोड़ रु जुटाएगी। जानकार बताते हैं कि 30 सालों में पहली बार राइट्स इश्यू लाना रिलायंस के जीरो कर्ज वाली कंपनी बनने के लिए आक्रामक रुख को दर्शाता है।
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