नयी दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मालिक और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी को मार्च 2021 तक "शून्य कर्ज" वाली कंपनी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस ऐलान के बाद से वे अपने प्लान्स में व्यस्त रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम से पता चलता है कि अंबानी की कंपनी इस कैलेंडर वर्ष के आखिर तक ही इस टार्गेट को हासिल करने की तरफ दौड़ रही है। हालांकि कोरोनोवायरस महामारी ने शून्य कर्ज योजना को कठिन चुनौती बना दिया, मगर अंबानी ने अपनी देनदारियों को कम करने के लिए पिछले कुछ हफ्तों में एक के बाद एक ताबड़तोड़ सौदे किए। इससे इस महामारी का असर उनके प्लान पर अप्रभावित लगता है। आइये जानते हैं अंबानी द्वारा किए गए सौदे और उनके आगे के प्लान के बारे में।
6600 करोड़ रुपये की ताजा डील
अंबानी ने सबसे ताजा डील 6600 करोड़ रुपये की है। अमेरिकी निवेश फर्म जनरल अटलांटिक रिलायंस की सब्सिडरी कंपनी जियो प्लेटफ़ॉर्म में निवेश वाली सबसे नई कंपनी है। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस की डिजिटल इकाई है। जनरल अटलांटिक जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.35 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 6600 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस निवेश के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स ने चार हफ्तों से भी कम समय में फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स और जनरल अटलांटिक जैसे दिग्गज प्रौद्योगिकी निवेशकों से 67,194.75 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
53,125 करोड़ रुपये जुटाने का जोरदार प्लान
इन निवेश डील के अलावा रिलायंस ने 30 सालों में पहली बार एक बहुत खास दांव चलने का फैसला लिया। कंपनी ने राइट्स इश्यू का ऐलान किया, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयर बेच कर ये 53,125 करोड़ रुपये जुटाएगी। 30 सालों में पहली बार राइट्स इश्यू लाना रिलायंस के जीरो कर्ज वाली कंपनी बनने के लिए आक्रामक रुख को दर्शाता है। बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक राइट्स इश्यू और ईंधन रिटेलिंग जॉइंट वेंचर में बीपी पीएलसी के 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से कंपनी को अपना लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं रिलायंस अपने ऑयल-टू-केमिकल बिजनेस में 20 फीसदी हिस्सेदारी सऊदी अरामको को भी बेच सकती है। रिलायंस ने सफाई भी दी है कि कोरोना के कारण अड़चनों के बावजूद अरामको के साथ ट्रैक पर है।
शून्य कर्ज योजना और उसके बाद
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2019 तक 5 सालों में रिलायंस ने अपने विभिन्न कारोबारों में 5.4 लाख करोड़ रु लगाए हैं। इसमें से 3.5 लाख करोड़ रु सिर्फ रिलायंस जियो पर खर्च किए गए। पर रिलायंस का कर्ज 3 लाख करोड़ रु से ऊपर पहुंचने पर अंबानी ने इसे कर्जमुक्त बनाने का फैसला लिया। एक्सपर्ट्स ने निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए भी रिलायंस की तारीफ की। इस वक्त कंपनी का कर्ज 1.61 लाख करोड़ रुपये है और कंपनी 2020 के आखिर तक कर्ज मुक्त हो जाएगी। पर रिलायंस का टार्गेट सिर्फ कर्ज मुक्त होने तक नहीं है, कंपनी ने अब वैश्विक निवेशकों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। उदाहरण के लिए फेसबुक के साथ गठजोड़ से रिलायंस के रिटेल कारोबारों को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। कंपनी ऐसे और निवेशकों की तलाश में है। इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि कर्ज मुक्त होना कंपनी के बड़े प्लान का हिस्सा है। रिलायंस का विजन टेक्नोलॉजी फर्स्ट पर है, जिससे इसे फ्यूचर में विस्तार करने में मदद मिलेगी।
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