देश में चाहे सरकारी बैंक हो या निजी बैंक सेवा शुल्क वसूलने में कोई भी पीछे नहीं हैं। देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत दूसरे बैंकों ने गरीबों से जीरो बैलेंस अकाउंट या बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स
नई दिल्ली, अप्रैल 12: देश में चाहे सरकारी बैंक हो या निजी बैंक सेवा शुल्क वसूलने में कोई भी पीछे नहीं हैं। देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत दूसरे बैंकों ने गरीबों से जीरो बैलेंस अकाउंट या बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स (बीएसबीडी) की कुछ सर्विसेज पर मनमाने चार्ज वसूले हैं। जी हां इस बात का खुलासा आईआईटी बॉम्बे की एक स्टडी में की गई है।

खाताधारकों से वसूले 300 करोड़ रुपये
जिसमें ये बताया गया है कि देश का सबसे बड़ा बैंक, एसबीआई भी गरीबों से अनुचित शुल्कों की वसूली कर रहा है। स्टडी में बताया गया है कि एसबीआई ने बीएसबीडी खाताधारकों पर चार के बाद प्रत्येक निकासी लेनदेन पर 17.70 रुपये का शुल्क लगाने का फैसला किया है, जिसे उचित नहीं माना जा सकता। 2015-20 के दौरान एसबीआई ने 12 करोड़ बीएसबीडी खाताधारकों पर सेवा शुल्क लगाकर 300 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं।
पीएनबी भी इसमें शामिल
देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के बीएसबीडी खातों की संख्या 3.9 करोड़ है। बैंक ने इस अवधि में इन खाताधारकों से 9.9 करोड़ रुपये जुटाए हैं। बता दें कि रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएसबीडीए पर कुछ बैंकों द्वारा रिजर्व बैंक के नियमनों का प्रणालीगत उल्लंघन किया जा रहा है। इनमें एसबीआई का नाम सबसे पहले आता है। एसबीआई द्वारा एक महीने चार निकासी लेनदेन के बाद प्रत्येक लेनदेन पर 17.70 रुपये वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि डिजिटल निकासी में भी एसबीआई यह वसूली कर रहा है।
2019-20 में 158 करोड़ रुपये जुटाए
आईआईटी-बंबई के प्रोफेसर के मुताबिक इस सेवा शुल्क के जरिये एसबीआई ने करीब 12 करोड़ बीएसबीडी खाताधारकों से 300 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें से 2018-19 में ही अकेले 72 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसके बाद 2019-20 में 158 करोड़ रुपये जुटाए गए। बीएसबीडीए पर शुल्क रिजर्व बैंक के सितंबर, 2013 के दिशानिर्देश के आधार पर लगाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि इन खाताधारकों को एक महीने में चार से अधिक बार निकासी का अधिकार होगा। यह बैंक के विवेक के आधार पर होगा, बशर्ते बैंक उसके लिए शुल्क की वसूली नहीं करे।
एक महीने में 4 बार से ज्यादा की निकासी की इजाजत
मालूम हो कि आरबीआई ने 2013 में साफ निर्देश दिया था कि ऐसे खाताधारकों को एक महीने में चार बार से ज्यादा की निकासी की इजाजत होगी। बैंक ऐसे लेन-देन पर कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। रिजर्व बैक एक महीने में 4 से ज्यादा निकासी को वैल्यू एडेड सर्विसेज मानता है।
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