नई दिल्ली, सितंबर 15। गौतम अडाणी काफी लंबे समय से चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने दुनिया के तीसरा सबसे अमीर व्यक्ति बनने का खिताब हासिल कर लिया। अब वे केवल एलन मस्क और जेफ बेजोस के पीछे हैं। मगर एक फैक्ट ऐसा भी है, जिस पर नजर डालना जरूरी है और वो यह कि अडानी ग्रुप का कर्ज बढ़ा है। ये 2.2 लाख करोड़ रु से बढ़ कर 2.6 लाख करोड़ रु हो गया है। अब सवाल है यह कि इतने कर्ज के बावजूद अडानी की संपत्ति इतनी अधिक कैसे हो गयी। आइए जानते हैं।
शेयर बजार से बढ़ी दौलत
गौतम अडानी की संपत्ति इस समय करीब 12 लाख करोड़ रु है। भारी कर्ज के बीच इतनी नेटवर्थ शेयर बाजार है। शेयर बाजार ऐसे अमीरों की संपत्ति बढ़ाने-घटाने में काफी अहम योगदान देता है। असल में अडानी या किसी भी अन्य अरबपति कारोबारी की दौलत की कैल्कुलेशन करते समय उसके पास जो शेयर होते हैं उनकी कीमत को भी जोड़ा जाता है। अब जब शेयर बाजार में शेयरों की कीमत बढ़ेगी तो नतीजे में अडानी की संपत्ति भी बढ़ेगी।
शेयरों में उछाल से बढ़ी दौलत
ऊपर बताए गए उदाहरण को ऐसे समझें कि यदि अडानी की कंपनियों के शेयर उछलते हैं तो उनकी संपत्ति भी बढ़ेगी। मगर किसी अमीर की अमीरी जांचने का फॉर्मूला मार्केट कैपिटल से बेहतर कंपनियों के रेवेन्यू यानी इनकम को माना जाता है। अडानी की संपत्ति को इस फॉर्मूले से देखें तो उनकी कंपनियों पर कर्ज एक बड़ा सवाल है। उनकी कंपनियों की इनकम भी उतनी नहीं है।
फॉर्च्यून मैग्जीन ग्लोबल 500 लिस्ट
अब बात करते हैं फॉर्च्यून मैग्जीन की ग्लोबल 500 लिस्ट में कंपनियों की। वे उन्हें रैंकिंग उनके रेवेन्यू के आधार पर देती है। मगर हैरानी की बात यह है कि अडानी की एक भी कंपनी इस लिस्ट में शामिल नहीं है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अडानी की असल दौलत शेयर बाजार में उनकी कंपनियों के शेयर में उछाल से बढ़ी है न कि उनकी कंपनियों के रेवेन्यू से। ऐसे में यदि उनकी कंपनियों के शेयर गिरते हैं तो जाहिर सी बात ही अडानी की दौलत भी घटेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों पिछले 2 साल में करीब 1100 फीसदी की उछाल आई है। इनमें अडानी एंटरप्राइजेज 730 फीसदी, अडानी ट्रांसमिशन 500 फीसदी से अधिक और अडानी पोर्ट करीब 96 फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। सेंसेक्स इस दौरान मात्र 40 फीसदी उछला है।
भारत की केवल 9 कंपनियां
फॉर्च्यून ग्लोबल 500 लिस्ट में भारत की 9 कंपनियां शामिल हैं। रेवेन्यू के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी और अव्वल कंपनी है एलआईसी, जो कि देश की सबसे बड़ी और सरकारी बीमा कंपनी है। 500 कंपनियों की लिस्ट में एलआईसी 98वें, रिलायंस इंडस्ट्रीज 104वें, इंडियन ऑयल 142वें, ओएनजीसी 190वें, एसीबआई 236वें, बीपीसीएस 295वें, टाटा मोटर्स 370वें, टाटा स्टील 435वें और राजेश एक्सपोर्ट्स 348वें नंबर है।
इन देशों की सबसे अधिक कंपनियां
इस लिस्ट में 145 कंपनियों के साथ चीन पहले, 124 कंपनियों के साथ अमेरिका दूसरे, 47 कंपनियों के साथ जापान तीसरे, 28 कंपनियों के साथ जर्मनी तीसरे, 25 कंपनियों के साथ फ्रांस चौथे और 18 कंपनियों के साथ यूके 5वें नंबर पर है।
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