
ULIP for Financial Target : हर किसी के जीवन के कुछ निश्चित टार्गेट होते हैं जिन्हें वे हासिल करना चाहते हैं। इनमें अपने सपनों का घर खरीदना, अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का इंतजाम करना, बच्चे की शादी, रिटायरमेंट के लिए प्लान बनाना और ऐसी कई अन्य आवश्यक ज़रूरतें शामिल हो सकती हैँ। पर ये लंबी अवधि के निवेश प्रोडक्ट्स से ही पूरी हो सकती हैं। भारतीय निवेशक परंपरागत तौर पर फिक्स्ड रिटर्न इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई प्रोडक्ट्स के रिटर्न में टैक्स के बाद गिरावट देखी गयी है। इनमें बैंक डिपॉजिट और सरकारी बचत योजनाएं शामिल हैं। पर कुछ ऑप्शन आपको लंबी अवधि में आपको फाइनेंशियल टार्गेट पूरा करने में मदद कर सकते हैं। इनमें एक है यूलिप (यूनिट लिंक्ड बीमा योजना)। यूलिप आपको लंबी अवधि में अपना फाइनेंशियल टार्गेट पूरा करने में मदद कर सकता है। आगे जानिए कैसे।
अनुशासित बचत
यूलिप में कम से कम 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है, और एक निवेशक को बचत के लिए अनुशासन बनाए रखते हुए रेगुलर टाइम पर निवेश करने की जरूरत होती है। लंबी अवधि के निवेश लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक पॉलिसीधारक को आदर्श रूप से 10 साल या उससे अधिक के लिए निवेशित रहने की आवश्यकता होती है। इस काम में यूलिप आपकी मदद करेगा।
लॉन्ग टर्म वेल्थ
यूलिप जोखिम लेने की क्षमता के स्तर के आधार पर इक्विटी और डेट फंड के बीच चयन करने की सुविधा देते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाकर, इक्विटी यूलिप फंड में निवेश करने से व्यक्ति एक बड़ा फंड बनाने में कामयाब हो सकता है, जो समय के साथ महंगाई को मात दे सकता है। यूलिप के माध्यम से रेगुवर इक्विटी निवेश का एक अन्य लाभ यह है कि यह विभिन्न फाइनेंशियल साइकिलों को संभालते हुए बाजार के उतार-चढ़ाव से होने वाले किसी भी नुकसान को कम करता है।
कंपाउंडिंग बेनिफिट
कंपाउंडिंग की पावर एक एसेट जनरेटिंग से रिटर्न हासिल करने और फिर उस रिटर्न पर और हासिल करने से सामने आती है। निवेशकों को पता होना चाहिए कि कोई भी निवेश हर साल इनकम जनरेट नहीं कर सकता है, और इसलिए, लंबी अवधि के लिए निवेशित रहने से कंपाउंडिंग की पावर से लाभ उठाने का एक बेहतर अवसर मिलता है क्योंकि इससे फंड के नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) को बढ़ने का समय मिलता है। लंबी अवधि के निवेश टार्गेट को प्राप्त करने के लिए, आपको यूलिप में कम से कम 10-15 साल या उससे अधिक समय तक निवेशित रहना चाहिए।
टैक्स-प्लानिंग इंस्ट्रूमेंट
यूलिप में निवेश से टैक्स बचत भी होती है। भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी और 10 (10डी) के तहत यूलिप से मिलने वाले प्रीमियम और रिटर्न टैक्स फ्री हैं। हालांकि, पिछले साल (2021) के बजट की घोषणा के साथ, यूलिप का मैच्योरिटी बेनेफिट कुछ परिस्थितियों में टैक्केशन के दायरे में आता है। यदि भुगतान किया गया कुल प्रीमियम सालाना 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो मैच्योरिटी बेनेफिट को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) के रूप में कैटेगराइज किया जाएगा और उस पर टैक्स लगाया जाएगा।
More From GoodReturns

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश, निवेश और विकास पर बनी सहमति

LPG Cylinder Price Hike: युद्ध के बीच बड़ा झटका! आज से एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़े

Bank holiday Today: महावीर जयंती पर आज बैंक खुला रहेगा या बंद? जाने से पहले चेक करें RBI हॉलिडे लिस्ट

Gujarat News: सताधार धाम बना आत्मनिर्भरता का प्रतीक, रोजाना 10 हजार श्रद्धालुओं का भोजन बायोगैस पर तैयार

कानूनी प्रक्रिया से ही तय हुआ JAL का भविष्य: Adani की जीत पर मुहर, CoC की ‘कमर्शियल विजडम’ सर्वोपरि



Click it and Unblock the Notifications