सोने पर जीएसटी की दर तय करने में जीएसटी काउंसिल को बहुत मशक्कत करनी पड़ी, पहले ये दर 5 फीसदी तय की गई थी जिसे केरल के अलावा सभी राज्यों ने खारिज कर दिया।
देश में जीएसटी (GST) लागू होने के बाद सबसे ज्यादा लोगों ने सोने (GOLD) के दाम सर्च किए हैं। जाहिर सी बात है भारत में दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा सोने की डिमांड है। जीएसटी आने के बाद सोने के दाम में थोड़ी से तेजी दर्ज की गई है। पहले जहां सोने पर 2 फीसदी तक कुल टैक्स लगता था वहीं अब 3 फीसदी तक टैक्स लगेगा। जीएसटी से पहले सोने पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क और एक फीसदी वैट लगता था वहीं अब जीएसटी के बाद सोने को 3 फीसदी के टैक्स स्लैब में डाल दिया गया है।
सोने पर जीएसटी की दर तय करने में जीएसटी काउंसिल को बहुत मशक्कत करनी पड़ी, पहले ये दर 5 फीसदी तय की गई थी जिसे केरल के अलावा सभी राज्यों ने खारिज कर दिया। इसके बाद जीएसटी काउंसिल ने सोने के दाम को 3 फीसदी अधिकतम जीएसटी में रखा है। वहीं आपको बता दें कि सोने पर 3 फीसदी जीएसटी सिर्फ सोने के गहनों पर लगेगा। सोने के बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोने के बिस्किट को हाउसडोल्ड यानि की घर में प्रयोग होने वाली वस्तुओं में नहीं बल्कि निवेश की वस्तु में रखा गया है। इसलिए सोने के बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी की दर लागू होगी। आगे देखें अपने शहर में सोने के दाम-
भारत में सोने के दामों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखा गया है। दिल्ली में सोने के दाम में तेजी देखी गई है वहीं चंडीगढ़ में सोने के दाम में 850 रुपए तक गिर गए हैं। आगे देखिए देश बड़े शहरों में सोने की कीमत।
देखें अपने शहर में सोने-चांदी के दाम
भारत में सोने के दामों में एक बार फिर उतार-चढ़ाव देखा गया है। दिल्ली में सोने के दाम में तेजी देखी गई है वहीं चंडीगढ़ में सोने के दाम में 850 रुपए तक गिर गए हैं। आगे देखिए देश बड़े शहरों में सोने की कीमत।
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सोने-चांदी के रेट बाजार पर निर्भर हैं, इसलिए दिए गए आंकड़े और वर्तमान में बाजार में सोने के दाम में फर्क हो सकता है।
कैसे तय होती है भारत में सोने की कीमत
यदि आप भारत में सोने के दामों पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि देश के हर शहर में सोने के भाव अलग-अलग हैं। कई शहरों में सोना महंगा होता है तो कई शहरों में सस्ता। तो भारत में सोने के भाव आखिर कैसे तय होतें हैं। भारत के शहरों में सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय भावों पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते हैं तो कई शहरों में ज़्यादा महंगा सोना पड़ता है। हमारे यहां सोने की खानें ज़्यादा नहीं है हमें अपनी ज़रूरत का सोना आयात करना पड़ता है। भारत में सरकारी और निजी बैंक सोना आयात करते हैं , साथ ही कुछ एजेंसीज भी हैं जो कि विदेश से सोना खरीदकर डीलर्स को भेजती हैं। आयात करने वालों की ये सूची बदलती रहती है और सरकार इसमें बदलाव करती रहती है।
भारत में सोना कौन लाता है?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, मिनरल और मेटल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन, यूनियन बैंक, सिंडीकेट बैंक आदि सोने के आयातक हैं। भारत में 38 बैंक हैं जो सोना बाहर से खरीदते हैं। बाद में ये बैंक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत का हिसाब लगाकर उसे भारत की मुद्रा में बदलते हैं फिर उस पर आयात शुल्क लगा देते हैं। इस तरह इसका भारत में सोने का भाव तय होता है। मगर ये अंतिम खुदरा भाव नहीं है, सोने कीमतें शहरों के बुलियन एसोसिएशन द्वारा निर्धारित होती है, जैसे कि मुंबई। उदाहरण के लिए मुंबई में आईबीजेए (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन), सोने का डीलर्स का एक एसोसिएशन हैं जहां उनके द्वारा कीमतें निर्धारित होती हैं बाद में इन्हें रिटेलर्स तक भेज दिया जाता है। इसके बाद रेट को पूरी तरह निर्धारित करने के लिए ये बड़े डीलर्स से संपर्क करते हैं और भविष्य की कीमतें तय करते हैं।
सोने का दाम तय करने की प्रक्रिया
सोने के भाव तय करने के अन्य तरीके भी हैं। आप सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव लेकर उसमें डॉलर के मुक़ाबले रुपए की कीमत को गुणा कर सकते हैं। बैंक सोना आयात, वैट, ओक्ट्रोई और लोकल खर्चे निकालकर इससे मुनाफा करते हैं। इसलिए, एक ज्वेलर की दुकान पर आप जो भुगतान करते हैं उसमें घड़ाई के चार्जेज(मेंकिंग चार्ज) के साथ ये सब चीजें भी जुड़ी होती हैं।
भारत में सोने के दाम अलग-अलग शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं
अलग-अलग राज्यों में सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। कुछ राज्यों में ट्रांसपोर्ट कोस्ट या परिवहन लागत ज़्यादा होती है। कुछ लोग मानते हैं कि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में सोने के भाव कम होते हैं क्यों कि यहां के बन्दरगाहों सोना सीधा पहुंचता है और अन्य लागतें बच जाती हैं। केवल ये ही कारण नहीं है कुछ अन्य कारण भी शहरों में सोने के इन भावों को प्रभावित करते हैं।
डॉलर से कैसे प्रभावित होती है सोने की कीमतें
सोने के भाव तय करने में करेंसी भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। उदाहरण के लिए, जैसे हमें सोना आयात करना होता है और इसका भुगतान डॉलर में करना होता है। अब यदि रुपए की कीमत डॉलर के मुक़ाबले 67 या 68 रुपए तक गिर जाती है तो हमें सोने के लिए 1 रुपया ज़्यादा देना पड़ेगा। जितना ज़्यादा सोना आयात किया जाएगा विदेशी विनिमय यानि फ़ोरेन एक्स्चेंज रिज़र्व भी देश में उतना ही ज़्यादा फ़्लो करेगा।
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