एलईडी लाइट्स, झूमर और मेड इन चाइना जैसी कई प्रकार की सजावटी लाइट होती हैं। जिनसे त्योहारों में लोगों के घर रोशन होते हैं। आजकल इन लाइट्स का बिजनेस लोग लाखों और करोड़ों रुपए में कर रहे हैं। क्योंकि यह बिजनेस न केवल त्योहारों में बल्कि शादी और पार्टी जैसे समारोह में भी काम आता है। इन लाइटों की कीमत तो आपको मिलती ही है साथ में इनको लगाने के चार्जेस अलग से मिलते हैं।
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
फेस्टिवल सीजन में कम पैसे में छोटा बिजनेस शुरु करके लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं। त्योहारों में भी सबसे खास होता है दिवाली का त्योहार, इस अवसर पर कई तरह के कारोबार कर सकते हैं जिससे आपकी लाखों की कमाई भी हो सकती है। जिसमें कि सजावटी लाइट्स लोगों के द्वारा सबसे ज्यादा खरीदी और बेची जाती हैं और सबसे बड़ी बात यह बिजनेस सिर्फ दिवाली में नहीं बल्कि पूरे सीजन में कारगर साबित होता है।
10 हजार रुपए के निवेश से कर सकते हैं शुरुआत
दिवाली के समय चाइनीज लाइटिंग की सेल सबसे ज्यादा होती है। फेस्टिव टाइम में डेकोरेटिव लाइटिंग बेचने का काम 10,000 रुपए के इन्वेस्टमेंट से शुरु किया जा सकता है। दिल्ली के थोक मार्केट सदर बाजार के थोक कारोबारियों से चाइनीज लाइटिंग और साथ ही भारतीय लाइटिंग खरीदी जा सकती हैं। इन पर रीटेलर को 25 से 30 फीसदी का मार्जिन मिल जाता है। सदर बाजार में एक ही तरह की लाइटिंग के मिनिमम 10 पीस मिलते हैं।
लाइटिंग बेचने के लिए नहीं चाहिए लाइसेंस
लाइटिंग का बिजनेस करने के लिए या लाइट बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए नगर-निगम या किसी भी स्टेट की पुलिस से लाइसेंस नहीं लेना होता है।
कहीं से भी कर सकते हैं बिजनेस
लाइट्स का बिजनेस ऐसा है कि आप इसे कहीं से भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको कोई स्पेशल जगह की जरुरत नहीं होती है। आप घर पर छोटी से दुकान या मेन मार्केट में भी वही दुकान खोल सकते हैं। यह आपके निवेश की राशि पर निर्भर करता है। साथ ही आप ऑनलाइन भी इन लाइट्स को बेच सकते हैं।
फायदा ज्यादा नुकसान कम
सजावटी लाइट का बिजनेस ऐसा है कि इसमें आपको सिर्फ और सिर्फ फायदा ही मिलेगा। इसमें नुकसान की गुंजाइस कहीं से भी नजर नहीं आती। क्योंकि त्योहारी सीजन में जितनी भी लाइट बिकी तो बिकी नहीं तो बचा हुआ माल बाद में शादी या पार्टी में काम आ सकता है।
किराए पर भी दे सकते हैं
सजावटी लाइट्स कई बार किराए पर भी ली जाती है। इसके लिए शहर के हिसाब से रेट दिया जाता है। एक या दो दिन के हिसाब से लोग इन लाइटों को किराए से लेते हैं और फिर किराये का पैसा देकर इन लाइट्स को भी वापस कर देते हैं। अगर इनमें किसी प्रकार का डैमेज होता है तो उसका कस्टमर को एक्सट्रा चार्ज भी देना पड़ जाता है।


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