नयी दिल्ली। यदि आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा 2019-20 के लिए 8.5% की ब्याज दर की घोषणा करने से निराश हुए थे तो फिर एक और झटके के लिए तैयार हो जाइए। 8.5 फीसदी ब्याज दर पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान ईपीएफओ की पूंजी पर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर तय की गई थी। मगर अब कोरोनावायरस के कारण ऐसा संभव है कि ईपीएफओ 7 फीसदी से अधिक ब्याज न दे। एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के सदस्यों को 6 मार्च को एक बैठक में बताया गया था कि डेब्ट निवेश 8.15 फीसदी और बाकी 0.35 फीसदी इक्विटी निवेश में मुनाफे से आ जाएगा। मगर हुआ ये कि मार्च में स्टॉक मार्केट में मची तबाही से ईपीएफओ के इक्विटी निवेश वैल्यू में 27,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई। फिलहाल यह साफ नहीं है कि क्या बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट आने से पहले ईपीएफओ फंड मैनेजर कुछ इक्विटी निवेश बेचने में कामयाब रहे थे या नहीं।
इक्विटी में ईपीएफओ का काफी कम निवेश
ईपीएफओ के पास जमा कुल राशि का 6 फीसदी से भी कम इक्विटी बाजार में लगा हुआ है, मगर बेंचमार्क इंडेक्स में आई 30 फीसदी गिरावट का असर इसके कुल रिटर्न पर पड़ सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एक अनुमान के मुताबिक ईपीएफओ के इक्विटी निवेश में आई गिरावट से इसके रिटर्न का गणित बिगड़ा है, जिसके चलते 2019-20 में ईपीएफओ 7 फीसदी से अधिक रिटर्न नहीं दे पाएगा।
पिछले 7 सालों में ईपीएफ दर
- 2018-19 : 8.65 फीसदी
- 2017-18 : 8.55 फीसदी
- 2016-17 : 8.65 फीसदी
- 2015-16 : 8.8 फीसदी
- 2014-15 : 8.75 फीसदी
- 2013-14 : 8.75 फीसदी
- 2012-13 : 8.5 फीसदी
इस समय 1.5 फीसदी कटौती बहुत अधिक नहीं
रिटर्न में 150 बेसिस प्वाइंट या 1.5 फीसदी की कटौती ऐसे समय में बहुत ज्यादा घातक नहीं लग सकती है जब शेयर बाजार 30% तक गिर गए हों, म्यूचुअल फंड 10-20% नीचे आ गए हों और ब्याज दरों में 70-80 बीपीएस अंकों की गिरावट आई हो। लेकिन भविष्य निधि के सदस्य मार्केट-लिंक्ड रिटर्न के आदि नहीं है। उनके लिए 15 बेसिस पॉइंट की कटौती भी चिंता का प्रमुख कारण है। सीबीटी एक सदस्य के मुताबिक ईपीएफओ सीबीटी की बैठक में घोषित किया गया 8.5% रिटर्न देगा। इससे फ्यूटर रिटर्न और जमा पूंजी पर क्या असर पड़ेगा ये हम अगले साल देखेंगे।
इक्विटी में शुरुआत रही थी शानदार
जब ईपीएफओ ने अगस्त 2015 में इक्विटी में निवेश करना शुरू किया, तो कई लोगों ने इस कदम का स्वागत किया। 2014 में शेयरों में तेजी के बाद काफी उम्मीद बढ़ गई। ईपीएफओ ने शुरुआत में निफ्टी ईटीएफ में 5% तक निवेश किया। फिर निवेश को 2017 में 10% और 2018 में 15% तक बढ़ाया। इस समय ईपीएफओ के समस्या इसका इक्विटी इक्विटी निवेश ही है। ईपीएफओ ने हमेशा बॉन्ड और अन्य निश्चित आय प्रतिभूतियों में निवेश किया है और इन निवेशों से मिलने वाले ब्याज के आधार पर दी जाने वाली ब्याज दर की घोषणा की।
ये भी है एक समस्या
कोरोना संकट के समय लोगों द्वारा पीएफ राशि निकालना ईपीएफओ के लिए एक और बड़ी समस्या है। ईपीएफओ प्रोविडेंट फंड से उन लोगों को पैसे निकालने की अनुमति दे रहा है जिनके सामने लॉकडाउन के कारण वित्तीय कठिनाइयां आ रही हैं। अगर ईपीएफ ने 2019-20 में लगभग 7% अर्जित किया, मगर वे 8.5% ब्याज दे तो साल के दौरान ही जो लोग पैसा निकाल रहे हैं वे अपने कमाए (अर्जित ब्याज दर) पैसे से अधिक पैसा ले जा सकते हैं।
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