क्रेडिट कार्ड का बिल आते ही जब हम 'Minimum Amount Due' (MAD) चुकाते हैं, तो एक पल के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन असल में यह एक खतरनाक वित्तीय जाल है। भारतीय ग्राहकों के लिए यह छोटी सी रकम आगे चलकर भारी पड़ सकती है। भले ही इसे भरने से लेट फीस नहीं लगती, लेकिन बचे हुए बैलेंस पर हर दिन मोटा ब्याज जुड़ता रहता है। नतीजा यह होता है कि आप कर्ज के ऐसे दलदल में फंस जाते हैं, जिससे निकलना आपकी प्लानिंग से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
आमतौर पर MAD आपके कुल बकाया बिल का सिर्फ पांच प्रतिशत होता है। बैंक का सिस्टम इस तरह काम करता है कि आपके द्वारा चुकाई गई रकम से पहले ब्याज और टैक्स वसूला जाता है, जिससे आपका मूल कर्ज (Principal) कम ही नहीं हो पाता। यही वजह है कि हर महीने भुगतान करने के बावजूद आपका कर्ज कम होने का नाम नहीं लेता। अगर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ और क्रेडिट स्कोर को दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो इस गणित को समझना बहुत जरूरी है।

कैसे ब्याज का चक्रव्यूह आपको कर्ज में डुबो देता है?
जैसे ही आप पूरा बिल चुकाने के बजाय सिर्फ मिनिमम ड्यू का विकल्प चुनते हैं, आप अपना 'इंटरेस्ट-फ्री ग्रेस पीरियड' तुरंत खो देते हैं। इसके बाद आप कार्ड से जो भी नई खरीदारी करेंगे, उस पर पहले ही दिन से ब्याज लगना शुरू हो जाएगा। भारत में ज्यादातर बैंक 45 प्रतिशत तक का सालाना ब्याज (APR) वसूलते हैं। इसका मतलब है कि आपकी छोटी सी शॉपिंग भी कुछ ही महीनों में आपको बहुत महंगी पड़ने वाली है।
मान लीजिए आपके कार्ड पर पचास हजार रुपये का बकाया है और उस पर भारी ब्याज लग रहा है। अगर आप सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाते रहे, तो इस कर्ज को पूरी तरह खत्म करने में आपको 15 साल से भी ज्यादा का समय लग सकता है। इस दौरान आप मूल रकम से दोगुना तो सिर्फ ब्याज के तौर पर भर देंगे। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि हमेशा पूरा बिल चुकाना ही सबसे समझदारी भरा फैसला क्यों है।
| भुगतान का तरीका | बकाया राशि | मासिक ब्याज | कर्ज चुकाने में लगा समय |
|---|---|---|---|
| पूरा बिल चुकाना | ₹50,000 | ₹0 | 1 महीना |
| सिर्फ MAD चुकाना | ₹50,000 | ₹1,500+ | 15+ साल |
क्रेडिट कार्ड के इस जाल से निकलने के स्मार्ट तरीके
इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए आपको हर महीने मिनिमम ड्यू से ज्यादा पैसे चुकाने का पक्का इरादा करना होगा। सबसे पहले, जब तक आपका बैलेंस जीरो न हो जाए, तब तक उस कार्ड से नई खरीदारी करना बिल्कुल बंद कर दें। अगर ब्याज दरें बहुत ज्यादा लग रही हैं, तो आप पर्सनल लोन या बैलेंस ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। इन तरीकों से आपको कम ब्याज देना होगा और कर्ज चुकाने की एक निश्चित समय सीमा भी मिल जाएगी।
भारी-भरकम ब्याज वाले कर्ज से बचने का इकलौता स्थायी तरीका 'फाइनेंशियल डिसिप्लिन' यानी वित्तीय अनुशासन है। अपने खर्चों पर हमेशा नजर रखें ताकि आप समय पर पूरा बिल भर सकें। मिनिमम ड्यू की आदत छोड़कर आप न केवल हजारों रुपये का ब्याज बचाएंगे, बल्कि अपना भविष्य भी सुरक्षित करेंगे। पूरा पेमेंट करने की प्राथमिकता आपके क्रेडिट स्कोर को ऊंचा रखती है और आपको मानसिक शांति भी देती है।


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