नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े करोबारी घराने रिलायंस के मुखिया मुकेश अंबानी और उनकी कंपनियां जब भी कुछ करती है, तो खबर बन जाती है। इस बार मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो कुछ ऐसा कर रही है। यह कंपनी मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की एक कंपनी को खरीदने की दौड़ में सबसे आगे बताई जा रही है। चर्चा है कि यह सौदा करीब 25,000 करोड़ रुपये में हो सकता है। अगर यह सौदा हो जाता है यह जहां अनिल अंबानी को अपने कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी, वहीं मुकेश अंबानी की जियो और मजबूत हो जाएगी। यानी इस डील से दोनों को तगड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
आइये जानते हैं कि यह कौन सी कंपनी है, और डील किस स्तर तक पहुंची है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस (ऑरकॉम) को खरीद सकती है रिलायंस जियो
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस की परिसंपत्तियों को खरीदने की दौड़ में रिलायंस जियो इस वक्त सबसे आगे चल रही है। रिलायंस जियाे ने यूवी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (यूवीएआरसी) जैसी कंपनियों के साथ मिलकर रिलायंस कम्युनिकेशंस (ऑरकॉम) के अधिग्रहण के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये की बोली लगा दी है। सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो और यूवी एसेट रिकंस्ट्रक्शन की बोलियां अपनी-अपनी श्रेणी में सबसे बड़ी हैं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस की सहयोगी कंपनियों के बिकने की तैयारी
मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने दिवाला संहिता के तहत नीलाम की जा रही ऑरकॉम की सहयोगी कंपनी के मोबाइल टॉवर एवं फाइबर कारोबार के लिए बोली लगाई है। यूवी एसेट की रुचि आरकॉम के स्पेक्ट्रम और रियल एस्टेट प्रॉपर्टी में है। एक सूत्र के अनुसार रिलायंस जियो और यूवीएआरसी 13 जनवरी 2020 को कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) की बैठक में सबसे बड़ी बोली लगाने वाले खरीदार के रूप में उभरे हैं। आरकॉम की इन सम्पत्तियों के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये की बोलियां सामने आई हैं।
-वर्ष 2012 से लेकर अभी तक दूरसंचार सेवा क्षेत्र की 12 बड़ी कंपनियों में से 9 कंपनियां या तो बंद हो चुकी हैं, या बाजार से निकल चुकी हैं।
-रिलायंस कम्युनिकेशंस पर बैंकों समेत कुल 38 कर्जदाताओं का करीब 33,000 करोड़ रुपये का बकाया है। इस प्रकार दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत बकाए का करीब तीन चौथाई पैसा इस प्रक्रिया से वसूल हो सकता है।
रिलायंस जियो की है करीब 4700 करोड़ रुपये की बोली
जानकारी के अनुसार रिलायंस जियो ने रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड के मोबाइल टॉवर एवं फाइबर परिसंपत्तियों के लिए 4700 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। वहीं यूवी एसेट की बोलियां कुल मिला कर 16,000 करोड़ रुपये की बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार इन दोनों कंपनियों ने कहा है कि वह 30 फीसदी पैसा 90 दिन के अंदर चुका देंगे। वहीं कर्ज देने वाले बैंकों को 3 महीने में करीब 8,000 रुपये का भुगतान किया जा सकता है।
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